सीमा शुल्क अधिनियम के अंतर्गत आयात-निर्यात पर निषेध क्यों लगाए गए है? आयात निर्यात नियंत्रण के लिए सीमा का उपयोग बताइए।

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सीमा शुल्क अधिनियम के अंतर्गत आयात-निर्यात पर निषेध (Restrictions on Import and Export under Custom Act) केन्द्र सरकार को यह अधिकार है कि वह सरकारी गजट में अधिसूचित करके विशेष रूप से वर्णित माल के आयात-निर्यात पर रोक लगा सकती है जिसका विवरण निम्न है

(1) भारत की सुरक्षा बनाए रखने हेतु भारत की आंतरिक व बाह्य सुरक्षा को बनाए रखने के लिए आयात-निर्यात पर प्रतिबंध लगाया जाता है। जैसे विदेशों से अस्त्र शस्त्र तथा विस्फोटक पदार्थ भारत में मुक्त रूप से आयातित न हो सकें इसके लिए विभिन्न अधिनियमों में प्रतिबंधात्मक प्रावधान किए गए हैं।

(2) मर्यादा व नैतिकता स्तर बनाए रखने हेतु-समाज में मर्यादा व नैतिकता सामान्य रूप से बनी रहे इसके लिए विलासिता की वस्तुएँ, शराब व मादक पदार्थों के आयात पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए हैं तथा कुछ वस्तुओं का आयात पूर्ण रूप से निषिद्ध होता है।

(3) तस्करी रोकने हेतु तस्करी एक सबसे विकृत आर्थिक समस्या है इससे जहाँ एक ओर सरकार को राजस्व की हानि होती है तो दूसरी ओर समाज गलत विदेशी वस्तुओं के उपभोग का आदी बन जाएगा। इसलिए सीमा शुल्क अधिनियम में सरकार द्वारा तस्करी रोकने के लिए विभिन्न प्रावधान व प्रतिबंधात्मक प्रावधान बनाए गए हैं।

(4) माल की अल्पता को रोकने हेतु यदि कोई वस्तु देश के आंतरिक उपभोग के लिए आवश्यक है तो ऐसी वस्तु के निर्यात पर रोक लगाने के लिए सरकार आवश्यक प्रतिबंध लगाती है तथा उन वस्तुओं का निर्यात रोक दिया जाता है ताकि देश के लोगों को इन वस्तुओं के अभाव का सामना न करना पड़े।

(5) विदेशी मुद्रा व भुगतान संतुलन को सुरक्षित बनाने हेतु विदेशी मुद्रा को बचाये रखने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न कानूनों में व्यवस्थाएँ की गई है तथा भुगतान संतुलन को अनुकूल बनाए रखने का भी सरकार द्वारा प्रयास किया जा रहा है। अतः इसके लिए सरकार द्वारा आयातों को हतोत्साहित तथा निर्यातों को प्रोत्साहित करने से सम्बन्धित क्रियाएँ व्यापक रूप से की जा रही है जिससे विदेशी मुद्रा भण्डार पर्याप्त मात्रा में बना रहे।

(6) सोने के आयात व चाँदी के निर्यात पर नियंत्रण हेतु देश की अर्थव्यवस्था को अनियंत्रित रूप से सोने के आयात या चाँदी के निर्यात से होने वाली हानि को रोकने के लिए कई प्रतिबंधात्मक कदम उठाए जाते हैं।

(7) कृषि उत्पाद या मछली उत्पाद के आधिक्य को रोकने हेतु कई बार मछली या कृषि उत्पाद देश में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं ऐसी दशा में उनका आयात यदि खुला कर दिया जाय तो आधिक्य की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी एवं किसानों व मछली उत्पादकों को हानि होगी। इसलिए सरकार इसके आयात पर प्रतिबंध लगा देती है।

(8) वस्तु वर्गीकरण व विपणन स्तर बनाए रखने हेतु-अन्तर्राष्ट्रीय मापदण्डों व राष्ट्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर आयात की जाने वाली वस्तुओं व निर्यात की जाने वाली वस्तुओं को उनके स्वरूप, आकार, गुण आदि में समान होने के लिए नियम बनाये जाते हैं।

(9) देशों उद्योगों को संरक्षण प्रदान करने हेतु देशी उद्योगों को संरक्षण प्रदान करने हेतु तथा विदेशी प्रतियोगिता से बचाने के लिए सरकार द्वारा आयातों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं। वर्तमान समय में विश्व व्यापार संगठन के आ जाने के कारण विदेशी वस्तुओं के आयात पर नियंत्रण लगभग हटा लिए गए हैं।

(10) कपटपूर्ण व्यवहारों को रोकने हेतु आयात-निर्यात में कपटपूर्ण एवं धोखाधड़ी के व्यवहारों को रोकने के लिए दण्डात्मक प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

(11) अन्तर्राष्ट्रीय दस्तावेजों की सुरक्षा हेतु महत्वपूर्ण दस्तावेजों को बिखरने से रोकने के लिए, मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों पर विपरीत असर न पड़ने देने के लिए तथा राष्ट्रीय अस्मिता को बचाए रखने के लिए माल के आयात-निर्यात पर कई राष्ट्रीय आर्थिक, सामाजिक एवं अन्तर्राष्ट्रीय कानूनी दृष्टियों से निषेधात्मक व प्रतिबंधात्मक उपाय अपनाए जाते हैं।

(12) पेटेन्ट ट्रेडमार्क व कॉपीराइट की रक्षा हेतु-देशी माल के पेटेन्ट, ट्रेडमार्क व कॉपीराइट के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी प्रतिबंधात्मक कदम उठाए जाते हैं।

(13) समाप्त होने वाले प्राकृतिक स्रोतों की रक्षा हेतु कुछ खनिज पदार्थ, पेड़-पौधे, जड़ी-बूटियाँ ऐसी होती हैं जिनके भण्डार सीमित होते हैं तो ऐसे माल या खनिज पदार्थों के निर्यात की अनुमति नहीं दी जाती है।

(14) किसी द्विपक्षीय समझौते या परम्पराताओं को लागू करने हेतु अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में विभिन्न देशों व राष्ट्र समूहों के बीच विभिन्न प्रकार के व्यापारिक समझौते व संधियाँ होते हैं। इनके पालन के लिए भी सरकार आयात-निर्यात की कुछ शर्तें लागू करती है।

(15) जीवन व स्वास्थ्य के बचाव हेतु सरकार वन्य जीवन संरक्षण एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए वन्य जीवों, वन्य जीवों की खालों, हाँयी दाँत, खतरनाक अवशिष्ट पदार्थों, घातक रसायनों, जहरीली गैसों के आयात निर्यात पर निषेध लगाती है।

(16) कलात्मक, ऐतिहासिक या पुरातत्व के महत्व की सम्पदा की रक्षा हेतु देश से पुरातत्व एवं ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएँ, जैसे-मूर्तियाँ, पेंटिंग्स, पांडुलिपियाँ, दुर्लभ डाक टिकट विदेशों में जाने से रोकने के लिए इनके निर्यात को प्रतिबंधित किया जाता है।

आयात-निर्यात नियंत्रण के लिए सीमा शुल्क का उपयोग (Use of Custom Duty for Controlling Import-Export) आयात-निर्यात नियंत्रण के लिए सीमा शुल्क का उपयोग निम्नलिखित प्रकार से किया जाता है

(1) सीमा शुल्क का उपयोग करने से देश को राजस्व की प्राप्ति होती है जो कुल कर राजस्व का 20% भाग के बराबर होता है।

(2) सीमा शुल्क का उपयोग आयात-निर्यात पर पूर्ण रूप से नियंत्रण कर अवैध रूप से माल के आयात निर्यात को रोकने हेतु प्रतिबंध लगाने के लिए किया जाता है।

(3) घरेलू व देशी उद्योगों को पूर्ण रूप से विदेशी प्रतियोगिता से बाहर रखकर संरक्षण प्रदान करने का कार्य भी सीमा शुल्क के माध्यम से किया जाता है जिससे घरेलू व देशी उद्योगों को अपने स्वयं के देश में संरक्षण प्राप्त हो सके।

(4) सीमा शुल्क की दरें सभी वस्तुओं पर समान नहीं होती हैं कुछ वस्तुओं पर कम दर तो कुछ वस्तुओं पर अधिक दर से कर लगाया जाता है।

(5) विदेशी तथा देशी उत्पादकों के मध्य गलाकाट प्रतियोगिता को रोकने तथा बाजार पर पूर्ण नियंत्रण करने के लिए भी सीमा शुल्क का उपयोग किया जाता है।

( 6 ) विदेशी मुद्रा की कमी को दूर करने तथा उसके अपव्यय को रोकने के लिए भी सरकार द्वारा विलासिता की वस्तुओं पर ऊँची से ऊँची दर से सीमा शुल्क लगाया जाता है जिससे यह वस्तुएँ अधिक महंगी होंगी और इनका आयात कम से कम किया जा सके।