“हम जहाँ कहीं है, विज्ञापन हमारे साथ है।” इस कथन का स्पष्टीकरण कीजिए तथा विज्ञापन की विशेषताओं एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।

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वास्तव में यह कथन है कि “हम जहाँ कही है, विज्ञापन हमारे साथ है।” पूर्णतया सत्य प्रतीत होता है। वर्तमान युग विज्ञापन का युग है। इसके बिना व्यापार एवं उद्योग धन्यों की उन्नति सम्भव नहीं है। यदि विज्ञापन को आधुनिक व्यापार एवं वाणिज्य की पुरी कहें तो कोई अतिश्योक्ति न होगी, क्योंकि विज्ञापन ने ही संसार में व्यापार को उन्नति के शिखर पर पहुँचा दिया है। एक विद्वान के अनुसार, “वर्तमान व्यापार की संजीवनी भी विज्ञापन ही है।” इसी कारण आज प्रत्येक निर्माता अपने द्वारा उत्पादित वस्तु को नये-नये तरीकों से विज्ञापन कर रहा है। आजकल विज्ञापन के अन्तर्गत उन सभी वस्तुओं को शामिल किया जाता है जिनके द्वारा नवनिर्मित वस्तु की जानकारी उपभोक्ता को प्रदान की जाती है, जिससे वे उसे खरीदने के लिए तत्पर हो जायें। आज चारों ओर विज्ञापन ही विज्ञापन दृष्टिगोचर होता है। हम जहाँ भी जाते हैं विज्ञापन को हम पीछा करते हुए पाते हैं। सुबह आँख खोलने से लेकर रात लेटने तक हम चारों ओर से विज्ञापनों में घिरे रहते हैं। कमरे के अन्दर लगे कलेण्डर भी विज्ञापन है, अखवार खोलते हैं तो विज्ञापन को पाते हैं, मैग्जीन पढ़ते हैं तो विज्ञापन के साथ पाते हैं। किसी कार्य से बाहर जाते हैं तो दीवारों, पोस्टरों आदि के माध्यम से विज्ञापन को हम अपने साथ पाते हैं। जब हम मनोरंजन के लिए टेलीविजन पर प्रसारित कार्यक्रम देखते हैं तो उस समय भी विज्ञापन को हम अपने साथ पाते हैं। आज विभिन्न निर्माता स्वयं की ड्रामा कम्पनी या संगीत कार्यक्रम बनाकर गाँव-गाँव जाते हैं और ग्रामीण का मनोरंजन करते हैं। इन कार्यक्रमों के मध्य में या अन्त में वे अपनी वस्तु का विज्ञापन गाने गाकर या ढोला सुनाकर या फिल्मी गानों के रूप में परिवर्तित करके करते हैं। जब हमें कोई वस्तु उपहार में मिलती है तो उसकी पैकिंग में विज्ञापन को अपने साथ पाते हैं। यह विज्ञापन वस्तु एवं संस्थागत विज्ञापन के रूप में देखने को मिलते हैं। वस्तु विज्ञापन में वस्तु के बारे में सूचना दी जाती है। इसका उद्देश्य किसी वस्तु के विशेष को बेचना है। यहाँ पर वस्तु शब्द में सेवा भी शामिल है। वस्तु विज्ञापन तीन प्रकार का होता है

(1) मार्गदर्शन विज्ञापन-यह वह विज्ञापन है जो वस्तु के जीवन-चक्र की प्रथम अवस्था में किया जाता है। इसमें उपभोक्ता की भावनाओं को जगाया जाता है। इसका उद्देश्य किसी वस्तु के बारे में सूचना देना है। इसमें किसी ब्राण्ड विशेष के लिए विज्ञापन नहीं किया जाता है। उदाहरण के लिए, टेलीविजन जब प्रारम्भ में बाजार में आया तो विज्ञापन किसी विशेष टेलीविजन के लिए नहीं किया गया बल्कि ग्राहक की भावनाओं को जगाने के लिए किया गया।

(2) प्रतियोगी विज्ञापन– यह वस्तु के जीवन चक्र की परिपक्वता की स्थिति में किया गया है। इसमें किसी ब्राण्ड विशेष को क्रय करने पर जोर दिया जाता है और इसके लिए उस ब्राण्ड की विशेषताओं पर अधिक जोर दिया जाता है।

(3) धारण शक्ति वाला विज्ञापन-यह विज्ञापन उस समय लाभकारी रहता है, जबकि वस्तु की बिक्री गिर रही है। इस विज्ञापन का उद्देश्य ग्राहक को वस्तु का नाम याद दिलाते रहना है। वह एक प्रकार का याद दिलाने वाला विज्ञापन होता है। संस्थागत विज्ञापन वे विज्ञापन है जिसमें वस्तु विशेष का नाम नहीं दिया होता है, लेकिन ग्राहकों से आग्रह किया जाता है कि कम्पनी की मुहर अवश्य देख लें, जैसे- फिलिप्स इण्डिया लिमिटेड कभी-कभी यह भी विज्ञापन करती है कि फिलिप्स कम्पनी की वस्तुएँ अच्छी है क्योंकि उसकी फिलिप्स कम्पनी हॉलेण्ड का सहयोग प्राप्त है। इसका उद्देश्य कम्पनी की ख्याति को बनाना है।

विज्ञापन की विशेषताएँ (Characteristics of Advertisement)

विज्ञापन की प्रमुख विशेषताओं को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-

1. विज्ञापन लिखित / मौखिक / चित्रित/दृश्य सन्देश है।

2. विज्ञापन एक सार्वजनिक प्रस्तुतीकरण है।

3. विज्ञापन के लिए विज्ञापनकर्ता द्वारा भुगतान किया जाता है।

4. विज्ञापन वस्तु या सेवा से सम्बन्धित जानकारी देने का एक व्यापक माध्यम है।

5. इसमें विभिन्न रंगों एवं चित्रों का प्रयोग किया जाता है।

6. विज्ञापन एवं प्रचार में अन्तर होता है।

7. विज्ञापन प्रस्ताव नहीं है, बल्कि प्रस्ताव के लिए आमन्त्रण है।

8. प्रत्येक विज्ञापन एक निश्चित विज्ञापक या प्रायोजक द्वारा किया जाता है।

9. यह सामान्य जनता को वस्तु को क्रय के लिए प्रेरित करता है।

10. विज्ञापन में सन्देश को बार-बार दोहराया जाता है जिससे लोग वस्तु को निरन्तर याद रखें।

विज्ञापन के कार्य (Functions of Advertising)

एक व्यवसायी द्वारा अपने व्यवसाय के विकास के लिए अपनाये जाने वाले उपायों में विज्ञापन आज के युग में सबसे उत्तम एवं महत्वपूर्ण उपाय है। अन्य शब्दों में, वर्तमान समय में कोई भी सफल व्यवसायी अपने लाभ को उसी समय अधिकतम कर सकता है जबकि वह विज्ञापन का सहारा लेता है। यही कारण है कि भूतपूर्व प्रेसीडेन्ट रूजवेल्ट का कथन है कि “यदि मेरा पुनर्जन्म होता है तो मेरे विचार से मैं अन्य किसी व्यवसाय की अपेक्षा विज्ञापन व्यवसाय को वरीयता दूँगा।” विज्ञापन के महत्वपूर्ण कार्य निम्न हैं

(1) उपभोग में वृद्धि-विज्ञापन से माँग तथा बिक्री दोनों में वृद्धि होती है। इस कारण वस्तुओं की माँग लगातार बनी रहती है तथा उत्पादन कार्य बड़े पैमाने पर किया जाने लगता है। इससे वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता पायी जाती है। इस प्रकार यह कहना गलत न होगा कि विज्ञापन उपभोग तथा रहन-सहन में वृद्धि का एक उत्तम साधन है।

(2) उपभोक्ताओं को सन्तुष्ट राना-विज्ञापन ग्राहकों के बीच पाये जाने वाले भ्रम को दूर करता है तथा रुचि या सन्तोष को बढ़ावा देता है। एक अच्छे व्यवसायी का सदैव यह प्रयास रहता है कि उसकी वस्तु की प्रशंसा इस प्रकार की जाये ताकि उपभोक्ता सदैव सन्तुष्ट रहे। इस रूप में भी विज्ञापन उपभोक्ता तथा उत्पादक दोनों की सहायता करता है।

(3) बिक्री में वृद्धि करना-विज्ञापन द्वारा ग्राहक को वस्तु के गुण उपयोगिता तथा लाभ आदि को सूचना दी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि करना होता है। इससे उत्पादन में वृद्धि होती है जिससे लागत में भी कमी आती है। प्रो. लंकास्टर के शब्दों में, “विज्ञापन मुद्रण के रूप में विक्रय कला है।” इस प्रकार विज्ञापन पिछली माँग को बनाये रखता है तथा बिक्री में वृद्धि करने में सहायक होता है।

(4) मध्यस्थों की सहायता करना-उत्पादन क्षेत्र से बाजार तक लाने के लिए वस्तुओं को विभिन्न मध्यस्थों की आवश्यकता पड़ती है इसीलिए विज्ञापन का एक अन्य महत्वपूर्ण कार्य मध्यस्थों की सहायता करना भी है। प्रत्येक उत्पादक वस्तुओं को बाजार में लाने से पूर्व ही अपनी वस्तुओं का विज्ञापन करके माँग उत्पन्न कर देता है। इससे मध्यस्थों को आसानी होती है।

(5) बिक्री का बीमा विज्ञापन एक प्रकार का बीमा है। निरन्तर विज्ञापन होते रहने के कारण उपभोक्ता को पता चल जाता है कि अमुक वस्तु अच्छी है। इससे वस्तुओं के प्रति उपभोक्ताओं की रुचि बढ़ती है तथा उपभोक्ताओं द्वारा इन वस्तुओं की माँग की जाने लगती है। इससे वस्तुओं की लोकप्रियता बढ़ती है। अतएव विज्ञापन बिक्री का बीमा है।

(6) ग्राहकों की रुचि को बनाये रखना-विज्ञापन एक ऐसा यन्त्र है जो उपभोक्ताओं की रुचि को बनाये रखने में भी सहायक होता है। इसके माध्यम से वस्तुओं के गुणों को विभिन्न ढंगों से उपभोक्ताओं को अवगत कराया जाता है। यही कारण है कि लोगों की रुचि तथा माँग सतत् पायी जाती है। इसीलिए विज्ञापन को व्यावसायिक शक्ति कहा जाता है।

(7) विक्रय बाधाओं को दूर करना-विज्ञापन, विक्रय की बाधाओं को भी दूर करने में सहायक कहा जाता है। किसी वस्तु के बारे में दी गयी गलत बातों के विज्ञापन से जनता को आसान लग जाता है। इससे मनोवैज्ञानिक सन्तुष्टि की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि गलत विज्ञापन का प्रभाव उपभोक्ताओं पर कम पड़ता है।

(8) मध्यस्थों की प्राप्ति का साधन-आज वस्तुओं का विक्रय करने में मध्यस्थों की आवश्यकता बराबर पायी जाती है। इसीलिए कहा जाता है कि जब किसी वस्तु का विज्ञापन बार-बार किया जाता है तो बहुत-से थोक व्यापारी वस्तु की एजेन्सी प्राप्त हेतु वे स्वयं उत्पादक से सम्पर्क स्थापित करते हैं। इस प्रकार मध्यस्थता स्थापित हो जाती है।

(9) नवीन बाजारों का विकास-विज्ञापन अपने ग्राहकों को उनकी वस्तुओं के बिक्री के लिए नये-नये क्षेत्रों या बाजारों का ज्ञान प्रदान करने में भी सहायक होता है। इससे बिक्री के बाजार का विस्तार होता है तथा वस्तुओं की गतिशीलता में भी वृद्धि होती है। इस प्रकार बाजार का क्षेत्र भी व्यापक हो जाता है। आज अन्तर्राष्ट्रीय बाजार का यही कारण है।

(10) परिवर्तनों के सम्बन्ध में सूचना कभी-कभी विशेषकर बड़े उत्पादकों को अपनी उत्पादन नीतियों में उपभोक्ताओं की रुचि, जलवायु या मौसम के अनुसार परिवर्तन करना पड़ता है। इस कार्य में भी विज्ञापन उत्पादकों की सहायता करता है। इसीलिए कहा जाता है कि विज्ञापन किसी प्रस्ताव को लोगों के समक्ष प्रस्तुत करने का ढंग है।

(11) वस्तु की श्रेष्ठता में विश्वास उत्पन्न करना-विज्ञापन वस्तु की श्रेष्ठता के प्रति भी जनता के मस्तिष्क में विश्वास उत्पन्न करता है। जो वस्तु जितने बड़े पैमाने तथा दूर-दूर तक विज्ञापित की जाती है उस पर उतना ही अधिक विश्वास लोगों में पाया जाता है। इसके माध्यम से ग्राहक एक वस्तु की तुलना दूसरी वस्तु से भी कर सकता है।

(12) जीवन स्तर में वृद्धि-विज्ञापन के माध्यम से ग्राहकों के विभिन्न प्रकार की नई-नई वस्तुओं की जानकारी प्राप्त होती है। यही नहीं विज्ञापन लोगों को उपभोग करने के लिए प्रेरित भी करता है। इसीलिए कहा जाता है कि श्रेष्ठतम वस्तुओं की उपलब्धि के कारण लोगों के जीवन में सुधार आता है तथा जीवन स्तर ऊँचा होता है।

(13) रोजगार के अवसर-विज्ञापन से समाज में रोजगार में अवसरों में वृद्धि होती है। विभिन्न प्रकार के कलाकारों, मुद्रकों तथा उत्पादन करने वाले श्रमिकों को रोजगार प्राप्त होते हैं। अन्य शब्दों में, विज्ञापन कुशल व्यक्तियों, जैसे रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।

चित्रकार, फोटोग्राफर तथा विभिन्न एजेन्सियों में लगे व्यक्तियों को

(14) विक्रय कला को प्रोत्साहन-विज्ञापन विक्रय कला से भी सहायता करता है। उपभोक्ताओं को पहले से यह मालूम होता है कि किन-किन क्षेत्रों में किन-किन विक्रेताओं के वस्तुएँ प्राप्त की जा सकती हैं। इस प्रकार उपभोक्ताओं तथा विक्रेताओं दोनों को ही इस प्रकार के विज्ञापनों से सहायता मिलती है। ये दोनों ही ताले व चाबी के समान होते हैं।

(15) कार्य करने की प्रेरणा- विज्ञापन से माँग में वृद्धि होती है इस कारण उत्पादन को बढ़ाना पड़ता है। इसके लिए श्रम विभाजन, विशिष्टीकरण तथा आधुनिकीकरण आदि का सहारा लिया जाता है। अतएव विज्ञापन उत्पादकों को परिश्रमी बनाता है तथा अधिक कार्य करने की प्रेरणा देता है।