परिवहन क्या है ? परिवहन के विभिन्न कार्यों को समझाइये। परिवहन साधनों का वर्गीकरण कीजिए। परिवहन के आर्थिक महत्व को विस्तारपूर्वक समझाइये।

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परिवहन का आशय एवं परिभाषा(Meaning and Definition of Transport) : परिवहन संस्था द्वारा उत्पादित उत्पाद को स्थान उपयोगिता प्रदान करता है अर्थात् उत्पाद को उन स्थानों पर उपलब्ध कराता है जहाँ-जहाँ उसकी माँग है। इसी प्रकार परिवहन उत्पाद को समय उपयोगिता भी प्रदान करता है। व्यापार एवं वाणिज्य के बड़े पैमाने पर विकास के लिए सस्ता एवं तीव्र परिवहन परम आवश्यक है क्योंकि परिवहन उत्पादन एवं विपणन कार्यों के मध्य एक आधारभूत कड़ी है। कारखानों में निर्मित उत्पाद एवं खेतों में पैदा की जाने वाली फसलें उनके उद्गम स्थान पर ही उपभोग नहीं की जाती, बल्कि ऐसे उत्पाद एवं फसलों को परिवहन के माध्यम से उन स्थानों तक पहुँचाया जाता है जहाँ उनकी कमी हो और ग्राहकों में माँग हो।

मनुष्य, सामग्री, समाचार आदि को एक स्थान से दूसरे स्थान पर अथवा देश-देशान्तर लाने-ले जाने के लिए ‘परिवहन’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। फेयर एवं विलियम्स के अनुसार, “परिवहन मनुष्यों अथवा सम्पत्ति का एक स्थान से दूसरे स्थान पर गमन करना है।” इस प्रकार माल, सेवाओं तथा मानव के स्वतन्त्र आवागमन का द्योतक है।

  • के. के. गुप्ता (K. K. Gupta) के अनुसार “परिवहन वह विपणन क्रिया है जिसके द्वारा . उत्पादन एवं उपभोग केन्द्रों के मध्य विद्यमान दूरी कम होती है।”
  • फेयर एवं विलियम्स (Fair and Williams) के अनुसार, “परिवहन मनुष्यों अथवा सम्पत्ति का एक स्थान से दूसरे स्थान पर गमन करना है।”

परिवहन के प्रमुख कार्य (Main Functions of Transport) : बड़े पैमाने पर उत्पादन के इस युग में परिवहन द्वारा व्यापार एवं उद्योग के क्षेत्र में निम्न महत्वपूर्ण कार्यों को सम्पादित किया जाता है

(1) ग्रामीण एवं शहरी अर्थव्यवस्था में सम्बन्ध, (2) कमी या अभाव के भय से दूर करना, (3) बीमा, बैंकिंग तथा संचार साधनों पर विकास, (4) प्राकृतिक साधनों का विदोहन, (5) विशिष्टीकरण एवं श्रम विभाजन (6) बड़े पैमाने पर उत्पादन को प्रोत्साहन, (7) वस्तुओं की माँग में वृद्धि, (8) सन्तुलित क्षेत्रीय विकास, (9) शक्ति के साधनों की उपलब्धता, (10) कृषि एवं औद्योगिक विकास में सहायक, (11) रोजगार अवसरों का सृजन, (12) उत्पादन के घटकों की गतिशीलता में वृद्धि करना, (13) स्थान उपयोगिता का सृजन करना, (14) राष्ट्रीय सुरक्षा में सहायक, (15) मूल्यों में स्थिरता लाना।

परिवहन के माध्यमों या साधनों का वर्गीकरण (Classification of Means or Modes of Transport)

वर्तमान समय में जल, थल एवं नभ मार्ग द्वारा परिवहन हेतु रेलों, बसों, कारों, ट्रकों, जहाजों वायुयानों आदि परिवहन साधनों का उपयोग किया जा रहा है अतः परिवहन साधनों को मुख्य रूप से तीन मुख्य वर्गों में विभाजित किया जा सकता है (I) थल परिवहन (Land Transport), (II) जल परिवहन (Water Transport), (III) वायु परिवहन ( Air Transport)।

(I) यल परिवहन (Land Transport ) : यह परिवहन का सबसे पुराना और सबसे महत्वपूर्ण साधन है। थल परिवहन को प्रमुख रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है (i) सड़क परिवहन, (ii) रेल परिवहन।

(i) सड़क परिवहन (Road Transport)- देश के आर्थिक विकास में सड़क परिवहन की विशेष भूमिका है। कम तथा मध्यम दूरी की यात्रा के लिए सड़क परिवहन सबसे अधिक उपयुक्त है। शीघ्र, विश्वसनीय तथा घर के दरवाजे तक की परिवहन सुविधा इससे ही सम्भव है। सड़क परिवहन अन्य परिवहन के साधनों की पूरक है। रस्किन के अनुसार, “राष्ट्र की सम्पूर्ण सामाजिक व आर्थिक प्रगति सड़कों पर ही निर्भर है।” बेन्हम के अनुसार, सड़के देश के शरीर की नाड़ियाँ हैं जिनके द्वारा प्रत्येक प्रकार की प्रगति दौड़ती है।” किसी राष्ट्र के स्वास्थ्य को अच्छा रखने के लिए सड़कें वही कार्य करती है जो शरीर में धमनियाँ व शिराएँ करती है। जिस प्रकार धमनियों स्वस्थ रक्त को शरीर के प्रत्येक अंग को देश के कोने-कोने में पहुँचाती है।

में पहुँचाती है, उसी प्रकार सड़कें राष्ट्रीय जीवन के आवश्यक अंगों तथा मनुष्यों, वस्तुओं तथा विचारों सड़कों को उनके महत्व के अनुसार मुख्य रूप से निम्नलिखित 5 भागों में विभाजित किया जाता है

(1) राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways ) (2) प्रादेशिक राजमार्ग (State Highways) (3) जिला सड़कें (District Roads) (4) ग्रामीण सड़कें (Village Roads) (5) सीमावर्ती सड़कें (Border Roads) सड़क परिवहन के लाभ (Merits of Rond Transport)-सड़क परिवहन के प्रमुख लाभ निम्न हैं-

(1) सड़क परिवहन व्यवस्था में कम पूंजी की आवश्यकता होती है।

(2) सड़क परिवहन राष्ट्रीय सुरक्षा में सहायक है।

(3) सड़क परिवहन से ग्रामीण विकास सम्भव हो सका है।

(4) सड़क परिवहन द्वारा विस्तृत क्षेत्र तक पहुँचा जा सकता है।

(5) सड़क परिवहन की अवस्था में माल को बार-बार उतारने चढ़ने की आवश्यकता नहीं रहती।

(6) पशु- धन का आवागमन सड़क परिवहन द्वारा कम समय में सुविधा से किया जा सकता है।

(7) सड़क निर्माण तथा रख-रखाव के कार्य में हजारों लोगों को रोजगार मिलता है।

(8) सड़क परिवहन के द्वारा कृषि पदार्थों के आवागमन को प्रोत्साहन मिलता है।

(9) सड़क परिवहन के द्वारा माल को शीघ्र एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जाता है।

(10) सड़क परिवहन में व्यक्ति की आवश्यकता के अनुसार सेवा प्रदान की जाती है। सड़क परिवहन के दोष (Demerits of Road Transport)-सड़क परिवहन के प्रमुख दोष निम्नलिखित है

(1) सड़क परिवहन कम विश्वसनीय होता है। (2) सड़क परिवहन में अधिकतर अनियमितता देखने को मिलती है।

(3) सड़क परिवहन में वस्तुओं की सुरक्षा नहीं हो पाती। (4) सड़क परिवहन भारी वस्तुओं के लिए अनुपयुक्त होता है।

(5) लम्बी दूरी की अवस्था में सड़क परिवहन अधिक खर्चीला होता है। (6) सड़क दुर्घटनाओं में जान व माल दोनों प्रकार की क्षति होती है।

(ii) रेल परिवहन ( Rail Transport)- रेल परिवहन बड़े पैमाने पर यात्रियों तथा माल के यातायात की आवश्यकताओं को पूरा करता है। हमारे देश में रेल परिवहन का मुख्य साधन है। अनाज, कोयला, रासायनिक खाद, पेट्रोलियम पदार्थ, राष्ट्रीय सुरक्षा सामान आदि लाने-ले जाने के लिए रेलों का उपयोग किया जाता है। रेल परिवहन का आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण योगदान है। रेल परिवहन द्वारा समय एवं स्थान उपयोगिता का सृजन सम्भव है। संचार प्रणाली, कृषि, औद्योगिक विकास आदि में रेल परिवहन अत्यन्त सहायक सिद्ध हुआ है। प्राकृतिक साधनों का विदोहन, सरकारी राजस्व में वृद्धि, रोजगार के नये अवसरों का सृजन, श्रम में गतिशीलता, शक्ति के साधनों का सदुपयोग आदि अनेक महत्त्वपूर्ण कार्य रेल परिवहन व्यवस्था के द्वारा ही सम्भव हो पाये हैं। सामाजिक परिवर्तन लाने व राष्ट्रीय एकता को बढ़ाने में भी रेलों का अत्यन्त महत्व है।

रेल परिवहन के लाभ (Merits of Rail Transport) रेल परिवहन के निम्न लाभ है

(1) रोजगार के अवसर, (2) लम्बी दूरी के लिए उपयुक्त, (3) सुरक्षित, (4) सस्ता साधन, विश्वसनीय, (6) भारी वस्तुओं के लिए उपयुक्त, (7) तीव्र गति। रेल परिवहन के दोष (Demerits of Rail Transport) रेल परिवहन के निम्न दोष हैं (1) अधिक पूँजी की आवश्यकता (2) ग्रामीण एवं पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अनुपयुक्त, (3) खर्चीला।

(II) जल परिवहन (Water Transport)

भारत में जल परिवहन प्राचीन परिवहन साधन है। भारतीय जल परिवहन का इतिहास अत्यन्त प्राचीन व गौरवमयी रहा है। डॉ. राधामुकुन्द मुकर्जी के अनुसार, “प्राचीन भारतीय सभ्यता संसार के कोने-कोने में उसकी विशाल समुद्री शक्ति से पहुँच सकी। शक्तिशाली जहाजी उद्योग के कारण ही संसार के लोग हमारे धर्म एवं संस्कृति से प्रभावित हुए। जल परिवहन व्यवस्था हमारे देश में ईसा पूर्व से ही विद्यमान थी।” परिवहन के अन्य साधनों की अपेक्षा जल परिवहन अत्यन्त सस्ता है, क्योंकि इसके लिए न तो सड़कें तैयार करनी पड़ती है, और न ही रेल की पटरी बिछाने की आवश्यकता होती है। यह परिवहन का सबसे प्राचीन साधन है। वर्तमान समय में सभी प्रकार की वस्तुओं के परिवहन के लिए इसका उपयोग किया जाता है। विश्व व्यापार में जल परिवहन की विशेष भूमिका रही है। जल परिवहन के लाभ (Merits of Water Transport)-जल परिवहन के प्रमुख लाभ अग्रलिखित हैं

(1) विशिष्ट क्षेत्रों के लिए उपयुक्त, (2) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का विकास, (3) भारी सामान के लिए उपयुक्त, (4) भीड़भाड़ नहीं, (5) सुरक्षित, (6) सस्ता साधन । जल परिवहन के दोष (Demerits of Water Transport)-जल परिवहन के प्रमुख दोष निम्न है-(1) राजनीतिक एवं अन्तर्राष्ट्रीय समस्याऐं (2) सीमित क्षेत्रों में सेवाएँ (3) कम विश्वसनीय, (4) धीमी गति।

(III) वायु परिवहन (Air Transport )

वायु परिवहन के आविष्कार का श्रेय राइट बन्धुओं को जाता है, जिन्होंने मानव की वायु में उड़ने की कल्पना को सन् 1904 में साकार किया। आज यह सेवा विश्वव्यापी हो गयी है और इसकी तीव्र गति के कारण दुनिया सिमटकर छोटी हो गयी है। अत्यन्त द्रुतगामी साधन होने के साथ-साथ यह धरातलीय बाचाओं से मुक्त भी है। सामरिक दृष्टि से वायु परिवहन सबसे अधिक उपयोगी माना जाता है। इसका उपयोग यात्रियों व माल को ढोने में किया जाता है। बाढ़, भूकम्प, युद्ध व अन्य आपातस्थिति में इसकी उपयोगिता विशेष है। आधुनिक प्रतिस्पर्धी युग में वायु परिवहन की उपयोगिता निरन्तर बढ़ती चली जा रही है। फेयर एवं विलियम्स के अनुसार, “मानव को उपलब्ध विभिन्न साधनों में से विमान परिवहन सबसे नवीनतम, सबसे अधिक विकासशील, सबसे अधिक चुनौती देने वाला तथा हमारे आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन में सबसे अधिक क्रान्ति लाने वाला है।”

वायु परिवहन के लाभ (Merits of Air Transport)-वायु परिवहन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित है (1) बीहड़ क्षेत्रों सर्वेक्षण किया जा सकता है।

(2) पर्यटन में वायु परिवहन का अत्यधिक महत्व है।

(3) वायु परिवहन आपातकाल या संकट में सहायक होता है।

(4) शीघ्र नाशवान वस्तुओं के परिवहन के लिए वायु परिवहन अधिक उपयुक्त है।

(5) वायु परिवहन की गति अत्यन्त तीव्र होती है।

(6) सांस्कृतिक एवं राजनीतिक सहयोग स्थापित करने में वायु परिवहन सहायक है।

(7) वायु परिवहन कृषकों के लिए सहयोगी सिद्ध होते हैं।

(8) सड़क परिवहन एवं जल परिवहन की तुलना में वायु परिवहन अधिक सुरक्षित है।

वायु परिवहन के दोष (Demerits of Air Transport)-वायु परिवहन के प्रमुख दोष निम्न है

(1) विमान अपहरण का डर बना रहता है।

(2) वायु यातायात का सफल संचालन करने हेतु उच्चस्तरीय प्रशिक्षण की आवश्यकता होती

(3) वायु परिवहन सुविधा सभी स्थानों के लिए सम्भव नहीं है।

(4) वायु परिवहन अत्यन्त खर्चीला है।

(5) अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबन्धों के कारण वायु परिवहन सेवाओं के विकास में रुकावट आती है।

(5) रेल एवं जल परिवहन की तुलना में वायु परिवहन की क्षमता सीमित होती है।

परिवहन का आर्थिक महत्व (Economic Significance of Transport) विपणन के क्षेत्र में परिवहन के साधनों का उतना ही महत्व है जितना मानव शरीर में रक्त बाड़ियों का महत्व है। परिवहन के साधनों ने वस्तु निर्माण व उसके वितरण में सहायता दी है इस प्रकार परिवहन का अत्यधिक महत्व है जिसे अग्रलिखित विन्दुओं से जाना जा सकता है

(1) कच्चे माल को कारणाने तक पहुँचाना-कच्चे माल को कारखाने तक पहुँचाने में परिवहन सुविधाएँ काफी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। बिना इनकी सुविधाओं के बड़े पैमाने पर उत्पादन कार्य करना सम्भव नहीं है।

(2) बड़ी मात्रा में उत्पादन-परिवहन के विकास से उत्पादन विशाल मात्रा में होने लगा है। खनिज और अन्य उद्योगों का विकास भी सम्भव हुआ। बड़ी मात्रा में उत्पादन करने के लिए यह आवश्यक है कि उपभोक्ता को उत्पादित माल कम कीमत पर व समय पर प्राप्त हो और साथ ही उत्पादकों को कच्चा माल, श्रम व पूँजी आदि भी पर्याप्त मात्रा में मिलती रहे जो परिवहन के साधनों द्वारा ही सम्भव है।

(3) उत्पादन लागत में कमी-परिवहन के सस्ते और पर्याप्त साधनों को उपलब्धि उत्पादन की लागत को कम करने में योगदान देती है क्योंकि उन्नत परिवहन की व्यवस्था से सस्ते और उत्तम कच्चे माल की व्यवस्था सम्भव हो जाती है।

(4) निर्मित माल उपभोक्ता तक पहुँचाना-कारखाने में निर्मित माल को उपभोक्ता तक पहुँचाने में भी ये परिवहन सुविधाएँ उपयोगी होती है। बिना इनकी सहायता के विपणन कार्य करना सम्भव नहीं है।

(5) मूल्यों में स्थिरता-परिवहन के साधनों की मदद से तथा माँग और पूर्ति को सन्तुलित करके मूल्यों को स्थिर रखा जा सकता है। परिवहन के साधन वस्तुओं को विभिन्न स्थानों पर समय पर पहुँचाकर मूल्य परिवर्तनों को कम करते हैं। यदि किसी क्षेत्र में किसी वस्तु का मूल्य कम होता है तो व्यापारी उसको उस क्षेत्र में ले जाते हैं जहाँ पर कि उसका मूल्य अधिक है। इस प्रकार परिवहन इन गतिविधियों से माँग व पूर्ति में समायोजन स्थापित कर मूल्यों में स्थिरता प्रदान करते हैं।

(6) प्राकृतिक साधनों का अनुकूलतम विदोहन- हमारे देश में प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में है। इन संसाधनों का अनुकूलतम विदोहन करके ही देश के आर्थिक विकास की गति को तीव्र किया जा सकता है। विदोहन के लिए आवश्यक श्रम तथा औजार गन्तव्य स्थान तक पहुँचाने तथा विदोहन के पश्चात् प्राप्त तेल, कोयला, खनिज आदि को कारखानों तथा उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए परिवहन सेवाएँ आवश्यक है।

(7) कृषि के विकास में सहायक परिवहन सेवाओं के विकास में कृषि के विकास को बढ़ावा दिया है। कृषि के लिए आवश्यक औजार, खाद, बीज, कीटनाशक दवाएँ आदि की उपलब्धता परिवहन सेवाओं के कारण अत्यन्त सरल हो गयी है। साथ ही उत्पादित फसलों को बाजारों तथा उपभोक्ताओं तक पहुँचाना आसानी से सम्भव हो गया है। आवश्यक साधनों को सहज उपलब्धि एवं उत्पादित माल की बाजार तक पहुँच ने कृषि उत्पादन में वृद्धि की है।

(8) विशिष्टीकरण में सहायक-परिवहन के साधन उत्पादन में विशिष्टीकरण लाने में बड़ी सहायता करते हैं। विशिष्टीकरण से तात्पर्य उत्पादित वस्तुओं की मात्रा, गुण, रूप आदि में विशिष्टता को प्रोत्साहित करती है। परिवहन के साधनों की प्रचुरता होने पर ही कुशल प्रशिक्षित श्रमिक, उत्तम सस्ता माल, नवीनतम वैज्ञानिक यन्त्र आदि की व्यवस्था हो जाने से उत्पादन में विशिष्टीकरण स्थापित हो जाता है।

(9) उद्योग-धन्धों का स्थानीयकरण-जिन स्थानों पर यातायात के सस्ते और अनुकूल साधन उपलब्ध होते हैं, वही उद्योगपति अतिरिक्त लाभ की प्राप्ति के लिए अपने उद्योग स्थापित करने को तैयार हो जाते हैं। यह कारण है कि यातायात की सुविधाओं से सम्पन्न क्षेत्रों में उद्योगों का स्थानीयकरण हो जाता है। बम्बई में सूती कपड़ा मिलों के केन्द्रीयकरण का कारण बम्बई बन्दरगाह की परिवहन सुविधाएँ ही थी

(10) विपणन क्षेत्र का विकास-जिस देश में परिवहन के साधन जितने विकसित होते हैं उस देश में विपणन के क्षेत्र में उतनी ही राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि होती है। इस क्षेत्र में वृद्धि से मानव समाज को सबसे कम प्रत्यक्ष लाभ हुआ है कि दैनिक जीवन की वस्तुएँ देश-देशान्तर से प्राप्त होने लगी है।