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अनुलाभ का क्या अर्थ है ? करमुक्त अनुलाभ कौन से हैं?

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What is meant by perquisite What are tax free benefits

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‘वेतन’ शीर्षक के अन्तर्गत कर योग्य वेतन की गणना विधि (Process of Computation of Taxable Salary Under Head of ‘Salaries’)

एक वेतनभोगी कर्मचारी को अपने नियोक्ता से नकद प्राप्तियों के अतिरिक्त जो भी सुविधाएँ या वेतन के स्थान पर लाभ प्राप्त होते हैं, उन्हें कर योग्य वेतन की गणना करते समय ध्यान में रखा जाता है। कर योग्य वेतन की गणना प्रक्रिया का अध्ययन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत किया जा सकता है

(A) सकल वेतन की गणना (Computation of Gross Salaries) कर्मचारी के सकल वेतन में शामिल होने वाली विभिन्न मदों को निम्न है

(I) वेतन की परिभाषा (Definition of Salary) आयकर अधिनियम के अनुसार वेतन में निम्न शामिल है-

(1) मजदूरी,

(2) कोई वार्षिकी या पेंशन,

(3) कोई ग्रेच्युटी,

(4) कोई फीस, कमीशन, अनुलाभ अथवा वेतन या मजदूरी के स्थान

(5) कोई अग्रिम वेतन (ऋण शामिल नहीं),

(6) अर्जित अवकाश का उपयोग न करने पर प्राप्त राशि, पर या उसके अतिरिक्त लाभ,

(7) प्रमाणित प्रॉवीडेण्ट फण्ड शेष में वार्षिक वृद्धि की कर योग्य राशि,

(8) अप्रमाणित प्रॉवीडेण्ट फण्ड से प्रमाणित प्रॉवीडेण्ट फण्ड को हस्तान्तरित शेष का कर

योग्य भाग। (II) भत्ते (Allowances)

एक वेतनभोगी कर्मचारी को अपने नियोक्ता से मूल वेतन के अतिरिक्त कुछ अन्य नकद प्राप्तियों भत्तों के रूप में प्राप्त होती हैं। इनमें से कुछ भत्ते सभी प्रकार के कर्मचारियों के लिए करमुक्त होते हैं, जबकि कुछ भत्ते आंशिक सीमा तक या पूर्ण सीमा तक कर योग्य होते हैं। इन भत्तों का विवरण निम्न है

(अ) पूर्णतया करमुक्त भत्ते (Fully Exempted Allowances) कर्मचारियों को प्राप्त इन भत्तों की रकम को उनके सकल वेतन की गणना करते समय जोड़ा। नहीं जाता है। इन भत्तों के सम्बन्ध में यह माना जायेगा कि नियोक्ता से इन भत्तों की जितनी रकम प्राप्त हुई है उतनी रकम कर्मचारी द्वारा उस उद्देश्य हेतु व्यय कर दी गई है। पूर्णतया करमुक्त भत्ते निम्न है

(1) विदेश या ओवरसीज भत्ता (Foreign or Overseas Allowance)- यह भत्ता भारत सरकार द्वारा अपने भारतीय कर्मचारियों को भारत के बाहर सेवा करने हेतु दिया जाता है। यह कर्मचारी के लिए पूर्ण रूप से करमुक्त होता है।

(2) कर्त्तव्यपालन में हुए व्ययों की पूर्ति हेतु भत्ता (Allowance for Reimbursement of Expenses spent for Official Duties) ये भत्ते कर्मचारी द्वारा वास्तव में व्यय की गई रकम तक कर मुक्त होंगे। शेष खर्च न की गई रकम कर-योग्य होगी। आयकर अधिनियम की धारा 10 (14) (i) के अनुसार इस सम्बन्ध में निम्न भत्ते अधिसूचित हैं-

(i) यात्रा भत्ता (Travelling Allowance)- यह भत्ता कर्मचारी को दौरे पर जाने सम्बन्धी व्ययों या सेवा के एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरण होने पर यात्रा के व्ययों की पूर्ति हेतु दिया जाता है। इसमें सामान की पैकिंग व उन्हें ले जाने के व्यय भी शामिल हैं।

(ii) दैनिक भत्ता (Daily Allowance)—यह भत्ता एक कर्मचारी को अपनी नौकरी से सम्बन्धित दौरे पर या अन्य किसी कारण से अपने कार्यस्थल से दूर जाने पर दैनिक व्ययों की पूर्ति हेतु दिया जाता है। उदाहरण के लिए, मिस्टर राजीव जो आगरा की एक कम्पनी में कार्यरत है, कम्पनी के किसी कार्य हेतु इलाहाबाद जाते हैं और उन्हें कम्पनी द्वारा दैनिक व्ययों की पूर्ति के लिए कोई भत्ता दिया जाता है तो ऐसा भत्ता पूर्णतया करमुक्त होगा।

(iii) सवारी या कार भत्ता (Conveyance or Car Allowance) कर्मचारी द्वारा अपने कार्यालय सम्बन्धी कर्त्तव्यों के निर्वाह हेतु दिया गया सवारी भत्ता करमुक्त होता है बशर्ते उसे नियोक्त द्वारा किसी भी प्रकार की करमुक्त यातायात की सुविधा उपलब्ध न कराई गयी हो।

(iv) सहायक भत्ता (Helper Allowance) करवाता अपने पद से सम्बन्धित कर्त्तव्यों की पूर्ति हेतु सहायक की नियुक्ति कर लेता है उस पर दिये गये व्ययों की पूर्ति हेतु यह भत्ता दिया जाता है। यदि कर्मचारी द्वारा सहायक को प्राप्त भत्ते में से कम रकम दी जाती है तो शेष रकम कर योग्य होगी।

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(v) वर्दी भत्ता (Uniform Allowance ) — कर्मचारी को पद से सम्बन्धित कर्त्तव्यों का पालन करने हेतु वर्दी खरीदने तथा उसके रख-रखाव (जैसे, धुलाई इत्यादि) सम्बन्धी व्ययों की पूर्ति हेतु यह भत्ता दिया जाता है।

(ब) आंशिक करमुक्त भत्ते (Partially Exempted Allowances) आंशिक करमुक्त भत्तों में उन भत्तों को रखा गया है जो कुछ निश्चित शर्तों की पूर्ति करने पर ही पूर्णरूप से अथवा कुछ सीमा तक करमुक्त होते हैं। आंशिक करमुक्त भत्ता यह भी माना जायेगा। जिसकी सम्पूर्ण रकम कर्मचारी के वेतन में जोड़ेंगे, तत्पश्चात् कुछ शर्तों के अन्तर्गत सकल वेतन में से

उस रकम को घटाएँगें; जैसे मनोरंजन भत्ता ऐसे आंशिक भत्तों की सूची निम्न है 1 (1) मकान किराया भत्ता (House rent allowance) (धारा 10 (13-A))- नियोक्ता अपने कर्मचारी को रहने के लिए मकान के किराये पर किये गये व्ययों की पूर्ति के लिए यदि मकान किराया भत्ता मिलता है, तो कर्मचारी को अपने नियोक्ता से प्राप्त मकान किराया भत्ता निम्न राशि तक कर मुक्त होगा

(i) सम्बन्धित अवधि में करदाता द्वारा प्राप्त वास्तविक भत्ता;

(ii) करदाता देय वेतन के 1/10 से अधिक भुगतान किया गया किराया;

(iii) मुम्बई, दिल्ली, चेन्नई एवं कोलकाता में स्थित आवास की दशा में करदाता को सम्बन्धित अवधि में देय वेतन का 1/2 अथवा 50%;

(iv) अन्य स्थानों पर स्थित आवास की दशा में, करदाता को सम्बन्धित अवधि में देय वेतन का 40% इन राशियों में जो राशि सबसे कम होगी वही करमुक्त होगी

1 स्पष्टीकरण- इसकी गणना हेतु वेतन का आशय जितनी अवधि के लिए करदाता ने मकान किराये पर ले रखा है उतनी अवधि का देय (due) मूल वेतन + महँगाई भत्ता या महँगाई वेतन (सेवा की शर्तों के अन्तर्गत) + कमीशन (यदि यह कर्मचारी द्वारा दी गई बिक्री पर एक स्थायी प्रतिशत से दिया जाता है) के योग से है, किन्तु इसमें बोनस नहीं जुड़ेगा।

(2) मनोरंजन भत्ता (Entertainment Allowance)- एक नियोक्ता अपने कर्मचारी को संस्था में आने वाले ग्राहकों के आदर-सत्कार पर व्यय करने हेतु भत्ता देता है। इस भत्ते की सम्पूर्ण रकम को सर्वप्रथम कर्मचारी के सकल वेतन की गणना करते समय जोड़ लेते हैं तथा बाद में कुछ निश्चित शर्तों की पूर्ति करने पर धारा 16 (ii) के अन्तर्गत सकल वेतन में आयकर प्रावधानों के अनुसार घटा देते हैं।

मनोरंजन भत्ते की कटौती कर्मचारी को मिले अथवा न मिले, कर्मचारी ने ग्राहकों की आवभगत पर रकम खर्च की हो अथवा न की हो, इस भत्ते की प्राप्त रकम को उसके सकल वेतन की गणना करते समय शामिल किया जायेगा।

(3) यातायात भत्ता (Transport Allowance)— नियोक्ता द्वारा अपने किसी कर्मचारी को उसके निवास स्थान से कार्यालय तथा कार्यालय से निवास स्थान वापस जाने सम्बन्धी व्ययों की पूर्ति के लिए यह भत्ता दिया जाता है। यह भत्ता ₹1,600 प्रति माह के आधार पर करमुक्त होगा। अंधे एवं अपंग कर्मचारियों की दशा में यह करमुक्त राशि ₹3,200 प्रति माह होगी।

(4) शिक्षा भत्ता (Education Allowance) कर्मचारी के बच्चों की शिक्षा के लिए उसे नियोक्ता से प्राप्त भत्ता ₹300 प्रति माह प्रति बच्चे के लिए (अधिकतम दो बच्चों के लिए) करमुक्त होगा। इससे अधिक रकम कर्मचारी के वेतन में शामिल की जायेगी।

(5) छात्रावास या हॉस्टल भत्ता (Hostel Allowance) कर्मचारी के बच्चों को छात्रावास में रखने से सम्बन्धित व्ययों के लिए नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को छात्रावास भत्ता प्राप्त होता है। इस भत्ते की रकम ₹ 300 प्रति माह प्रति बच्चे के लिए (अधिकतम दो बच्चों के लिए) करमुक्त होगी। इससे अधिक रकम कर्मचारी के वेतन में शामिल की जायेगी।

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(6) परिवहन संस्था में कार्यरत कर्मचारियों को विशेष भत्ता (Special Allowance to Employees of Transport Agencies) जो कर्मचारी यातायात संस्थाओं या परिवहन की किसी संस्था में कार्यरत हैं और उन्हें यातायात संचालन के लिए भारत में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने सम्बन्धी व्ययों के लिए भत्ते दिये जाते हैं तो ऐसे भत्तों का 70% अथवा ₹10,000 प्रति माह (दोनों में जो भी रकम कम हो) कर्मचारी के लिए करमुक्त होगी।

(7) जनजाति क्षेत्र भत्ता (Tribal Area Allowance) उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड और उड़ीसा के जनजाति क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए ₹ 200 प्रति माह अथवा वास्तविक प्राप्त रकम (दोनों में जो कम हो) करमुक्त होगी। इससे अधिक रकम कर्मचारी के सकल वेतन में शामिल की जायेगी।

(स) पूर्णतया कर योग्य भत्ते (Fully Taxable Allowances) करमुक्त भत्तों के अलावा अन्य सभी भत्तों की सम्पूर्ण रकम कर योग्य होती है और करदाता की वेतन की आय में जोड़ी जाती है। कुछ पूर्णतया करयोग्य भत्तों के नाम निम्नलिखित हैं

(i) महँगाई भत्ता (Dearness allowance);

(ii) अतिरिक्त महँगाई भत्ता (Additional dearness allowance);

(iii) महँगाई वेतन (Dearness pay);

(iv) नगर क्षतिपूरक भत्ता (City compensatory allowance);

(v) चिकित्सा भत्ता (Medical allowance);

(vi) नौकर भत्ता (Servant allowance);

(vii) प्रॉक्टर भत्ता (Proctor allowance);

(viii) वार्डन भत्ता (Wardenship allowance)

(ix) कुत्ता भत्ता (Dog allowance)

(x) अधिसमय भत्ता (Overtime allowance)।

(III) अनुलाभ (Perquisites)

अंग्रेजी शब्दकोश ‘ऑक्स्फोर्ड’ के अन्तर्गत ‘अनुलाभ’ शब्द को किसी आकस्मिक उपलब्धि (Casual emoluments) अथवा लाभ के रूप में परिभाषित किया गया है। सामान्य शब्दों में, अनुलाभ एक व्यक्तिगत लाभ है जो कर्मचारी को उसके सामान्य वेतन के अतिरिक्त उसकी सेवा तथा पद के कारण दिये जाते हैं। अनुलाभों में व्ययों की क्षतिपूर्ति शामिल नहीं होती है। अनुलाभ नियोजक के द्वारा कर्मचारी को बिना कुछ धन लिये या रियायत पर दी गयी ऐसी सुविधाएँ हैं जिनके बदले में मुद्रा का भुगतान नहीं किया जाता।

(अ) सभी प्रकार के कर्मचारियों के लिए कर योग्य अनुलाभ (Taxable Perquisites for All Employees) इन अनुलाभों को सामान्य अनुलाभ भी कहते हैं। ये अनुलाभ किसी भी प्रकार के कर्मचारी अथवा किसी भी श्रेणी के कर्मचारी को नियोक्ता के द्वारा सुविधा दी जाती है तो इसका मूल्य आयकर अधिनियम के अनुसार सभी प्रकार के कर्मचारियों के लिए कर योग्य होगा। ये अनुलाभ निम्नलिखित है—

(1) किराये से मुक्त रहने का मकान (Rent-free house or accommodation) नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को रहने के लिए बिना किराया लिये एक मकान की सुविधा दी जाती है तो इसका आयकर के प्रावधानों के अनुसार मुद्रा में मूल्य ज्ञात करके ‘वेतन’ शीर्षक की आय में जोड़ेंगे। यह अनुलाभ सभी कर्मचारियों के लिए कर योग्य होता है। किराये से मुक्त मकान के मूल्यांकन के लिए कर्मचारियों को निम्न दो वर्गों में तथा मकान को निम्न दो वर्गों में विभक्त करते हैं

(अ) सरकारी कर्मचारी (Government employees) वे कर्मचारी जो केन्द्रीय सरकार अथवा राज्य सरकार के अन्तर्गत किसी पद पर नियुक्त हैं अथवा ऐसे केन्द्रीय तथा राज्य सरकार के कर्मचारी जिनकी सेवाएँ सरकार द्वारा नियन्त्रित संस्थाओं या निकायों को उधार दे दी गई हैं, सरकारी कर्मचारी के वर्ग में आते हैं। किन्तु विदेशी सरकार के कर्मचारी इस वर्ग में नहीं आते।

असुसज्जित (unfurnished ) मकान की दशा में मूल्यांकन केन्द्रीय अथवा राज्य सरकार द्वारा आवास के सम्बन्ध में ‘निर्धारित लाइसेंस फीस’ जो उसी सरकार द्वारा बनाये गये नियमों के अनुसार है-कर्मचारी द्वारा वास्तव में चुकाया किराया

विपणन की रीति-नीति या विपणनीय व्यूहरचना से आपका क्या अभिप्राय है ? समग्र विपणन रीति-नीति बनाते समय विचार किये जाने तथ्यों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

(2) रियायती किराये पर रहने के लिए मकान की सुविधा (Concessional rent-free house or ccommodation ) – कर्मचारी को मकान की सुविधा कम किराया लेकर या कुछ रकम उसके वेतन में से काटकर भी दी जा सकती है। इसे रियायती मकान की सुविधा कहते हैं। यह सुविधा भी प्रत्येक प्रकार की सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए कर योग्य है। इस सुविधा का मूल्यांकन अग्र है

(3) कर्मचारी के दायित्वों का नियोक्ता द्वारा भुगतान (Payment of employee’s obliga tions by employer)—एक नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के ऐसे दायित्वों का भी भुगतान किया जा सकता है जिसे यदि नियोक्ता न करता तो कर्मचारी को करने पड़ते। ऐसे भुगतानों की गत वर्ष में नियोक्ता द्वारा वास्तव में चुकाई गई रकम कर्मचारी के वेतन में शामिल की जायेगी।

(4) नियोक्ता द्वारा देय राशि (Amount Payable by the Employer)—नियोक्ता प्रत्यक्ष रूप से अथवा किसी फण्ड (प्रमाणित प्रॉवीडेण्ट फण्ड अथवा अस्वीकृत सुपर ऐजुएशन फण्ड अथवा जमा लिंक्ड बीमा विधि को छोड़कर) के द्वारा कर्मचारी की ओर से किसी दायित्व के भुगतान करने की जिम्मेदारी लेता है, तो ऐसे दायित्व की राशि कर्मचारी के वेतन में गत वर्ष में शामिल की जायेगी भले ही भुगतान वास्तव में गत वर्ष में नहीं किया हो, अर्थात् यह अनुलाभ ‘देयता’ के आधार पर कर योग्य होगा। उदाहरण के लिए, रोजगार की शर्तों के अनुसार नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के जीवन बीमा प्रीमियम की रकम का भुगतान किया जाता है।

(ब) विशिष्ट कर्मचारियों के लिए कर योग्य अनुलाभ (Taxable Perquisites for Specific Employees) कभी-कभी एक नियोक्ता अपने कर्मचारियों को उसके मौद्रिक दायित्वों का भुगतान अथवा पुनर्भरण करने की बजाय उसे सुविधाओं के रूप में अनुलाभ देता है। ऐसे अनुलाभों का मूल्य केवल विशिष्ट वर्ग के कर्मचारियों के ही वेतन में शामिल किया जायेगा। वस्तु के रूप में किसी भी लाभ या सुविधा किराया मुक्त या रियायती मकान, सीमान्त लाभ या सुविधाएँ जिनके मूल्य विहित है, को छोड़कर का मूल्य कर्मचारी के वेतन में तभी शामिल किया जायेगा, जबकि कर्मचारी विशिष्ट कर्मचारी की श्रेणी में आता हो। एक कर्मचारी विशिष्ट कर्मचारी की श्रेणी में तभी माना जायेगा, जबकि वह निम्न तीन शर्तों में से किसी एक शर्त की पूर्ति करे

(i) कर्मचारी का नियोक्ता कम्पनी में संचालक होना पूर्णकालीन अथवा अंशकालीन।

(ii) कर्मचारी ने नियोक्ता कम्पनी के कम से कम 20% या अधिक समता अंशों को प्राप्त किया हो अर्थात् कर्मचारी नियोक्ता कम्पनी में सारवान हित रखता है।

(iii) कर्मचारी को प्राप्त कर योग्य मौद्रिक प्राप्तियों का योग ₹50,000 से अधिक हो— कर्मचारी को एक या दो से अधिक नियोक्ताओं से प्रायः प्रत्येक वर्ष विभिन्न कर योग्य नकद प्राप्तियाँ होती हैं। इन प्राप्तियों का योग धारा 16 के अन्तर्गत वर्णित कटौतियाँ घटाने के बाद ₹50,000 से अधिक होना चाहिए। ये कटौतियाँ मनोरंजन भत्ते एवं कर्मचारी द्वारा चुकाये गये रोजगार-कर के सम्बन्ध में हैं।

नियोक्ता द्वारा निम्न में से सभी अथवा कुछ अनुलाभ व सुविधाएँ (Amenities) कर्मचारी को निःशुल्क अथवा रियायती दर पर दी जा सकती हैं। इनका कर योग्य मूल्य कर्मचारी के वेतन में जोड़ा जायेगा बशर्ते कर्मचारी विशिष्ट व्यक्ति हो। ऐसी सुविधाओं के कुछ उदाहरण निम्न है

(1) मोटर कार की सुविधा

(2) घरेलू नौकरों की सुविधा

(3) बच्चों की निःशुल्क शिक्षा की सुविधा;

(4) गैस, बिजली व पानी की सुविधा;

(5) अन्य किसी सुविधा या लाभ का मूल्य।

(स) सभी कर्मचारियों के लिए करमुक्त अनुलाभ (Tax-free Perquisites for All Employees) आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार तथा केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के निर्देशानुसार एक कर्मचारी को नियोक्ता से प्राप्त कुछ सुविधाओं के मूल्य को कर्मचारी के वेतन शीर्षक की आय की गणना करते समय शामिल नहीं किया जाता है, अर्थात् ये सुविधाएँ सभी प्रकार के कर्मचारियों के लिए पूर्णतया करमुक्त है। इन करमुक्त अनुलाभों की सूची निम्न है

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(1) चिकित्सा सुविधाएँ यदि नियोक्ता ने कर्मचारी को कोई चिकित्सा सुविधा या चिकित्सा व्ययों की प्रतिपूर्ति की हो तो उसका मूल्यांकन निम्न प्रकार किया जायेगा

(A) भारत में चिकित्सा-

(अ) यदि नियोक्ता ने कर्मचारियों एवं उनके परिवार के सदस्यों की चिकित्सा के लिए कोई चिकित्सालय खोल रखा है और वहाँ पर निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाती है तो ऐसी सुविधा करमुक्त मानी जाएगी।

(ब) सरकारी अस्पताल या स्थानीय सत्ता के चिकित्सालय में कर्मचारी ने कोई इलाज करवाया हो और नियोक्ता ने उसके व्ययों की प्रतिपूर्ति की हो तो ऐसी राशि पूर्णतः करमुक्त मानी जाएगी।

(स) यदि कर्मचारी ने निजी चिकित्सालय या नर्सिंग होम या क्लीनिक में अपना या अपने परिवार का इलाज करवाया हो और नियोक्ता द्वारा ऐसे चिकित्सा व्ययों का भुगतान किया गया हो तो ₹15,000 तक की राशि करमुक्त होगी।

(B) विदेश में चिकित्सा- (अ) नियोक्ता द्वारा कर्मचारी अथवा उसके परिवार के सदस्यों की भारत के बाहर चिकित्सा पर किये गये व्यय पूर्णतः करमुक्त होंगे। (भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा स्वीकृत सीमा तक)।

(ब) मरीज तथा मरीज के साथ उसकी देख-भाल करने के लिए गये हुए एक व्यक्ति की विदेश यात्रा एवं विदेश में व्हरने पर नियोक्ता द्वारा किये गये व्यय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमति दी गई राशि तक करमुक्त होंगे।

(स) मरीज तथा उसके साथ देखभाल के लिए गये हुए एक व्यक्ति की विदेश यात्रा पर नियोक्ता द्वारा किये गये व्यय तभी करमुक्त होंगे, यदि कर्मचारी की सकल कुल आय (ऐसे व्यय को छोड़कर) र 12 लाख से अधिक न हो।

(2) नाश्ते आदि की सुविधा- इसकी करमुक्ति के लिए शर्त यह है कि यह सुविधा कार्यालय के समय में तथा कार्यालय परिसर में दी गई हो। नाश्ते के अन्तर्गत चाय अथवा स्नैक्स शामिल हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को कार्यालय समय में नाश्ते की सुविधा उपलब्ध कराना करमुक्त अनुलाभ है।

(3) मनोरंजन की सुविधाये सुविधाएँ कर्मचारियों को सामूहिक रूप से दी जानी चाहिए तभी करमुक्त होगी। यदि यह सुविधा कुछ चुने हुए कर्मचारियों को ही प्रदान की जाती है तो करमुक्त नहीं होगी।

(4) टेलीफोन की सुविधा कर्मचारी के आवास पर लगे टेलीफोन के बिलों का भुगतान जिन्हें नियोक्ता द्वारा चुकाया जाता है, कर्मचारी के लिए करमुक्त होते हैं चाहे फोन का उपयोग किसी भी कार्य में किया गया हो। टेलीफोन में मोबाइल फोन भी सम्मिलित है।

(5) प्रशिक्षण की सुविधा नियोक्त द्वारा इन कार्यों के लिए चुकाई गई फीस करमुक्त अनुलाभ होगी, क्योंकि इनके द्वारा कर्मचारी अपनी सेवाओं को अधिक कुशलता एवं क्षमता प्रदान करता है। यदि कर्मचारी इन पर व्यय करता है तो यह उसके वेतन में से नहीं पटाई जायेगी। इन सुविधाओं में इन उद्देश्यों हेतु रहने एवं खाने आदि पर किये गये व्यय भी शामिल हैं।

(6) निःशुल्क भोजन (Free meal) कार्यालय के समय के अन्तर्गत तथा कार्यालय परिसर या व्यावसायिक भवन में दिया गया मुफ्त भोजन कर्मचारी के लिए करमुक्त अनुलाभ है।

(7) कर्मचारी के बच्चों के लिए शिक्षा सुविधा किसी नियोक्ता द्वारा संचालित शिक्षण संस्था में कर्मचारी के बच्चों को उपलब्ध शिक्षा की सुविधाओं का मूल्य अथवा नियोक्ता द्वारा अन्य संस्था में कर्मचारी के बच्चों को उपलब्ध कराई गई मुफ्त शिक्षा की सुविधा का मूल्य कर्मचारी के लिए करमुक्त होगा बशर्ते ऐसी सुविधा का मूल्य ₹ 1,000 प्रति माह प्रति बच्चा से अधिक नहीं हो।

निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए मकान सम्पत्ति से करमवत आय, मकान निर्माण हेतु ऋण पर ब्याज ।

(8) स्वास्थ्य क्लब एवं खेल की सुविधाएँ—ऐसी सुविधाओं के प्रयोग करने पर इनका मूल्य करमुक्त होगा यदि इन सुविधाओं को सभी कर्मचारियों को समान रूप से उपलब्ध कराया जाता है। (IV) वेतन के स्थान पर लाभ (Benefits in Place of Salary)

वेतन के स्थान पर लाभ में निम्नलिखित शामिल है – (1) करदाता द्वारा अपने वर्तमान अथवा किसी पहले नियोक्ता से नौकरी से हटाने के सम्बन्ध में अथवा नौकरी की शर्तों में परिवर्तन करने के सम्बन्ध में प्राप्त होने वाली क्षतिपूर्ति की कोई रकम ।

(2) किसी वर्तमान अथवा भूतपूर्व नियोक्ता द्वारा करदाता को देय अथवा दिया हुआ कोई भुगतान। यदि नियोक्ता अपने कर्मचारी को कोई राशि व्यक्तिगत भेंट के रूप में देता है जो उसकी अच्छी सेवाओं के कारण न दी गई हो तो वह राशि उस कर्मचारी के लिए करयोग्य नहीं होगी।

(3) अप्रमाणित प्रोविडेण्ट फण्ड अथवा किसी अन्य फण्ड में से किया गया कोई भुगतान केवल नियोक्ता के अंशदान तथा उस पर ब्याज की राशि तक करयोग्य होगा। इस फण्ड में कर्मचारी के स्वयं के अंशदान पर प्राप्त व्याज करमुक्त नहीं है। यह ‘वेतन’ शीर्षक की बजाय ‘अन्य साधनों से आय’ के शीर्षक में करयोग्य है।

(B) सकल वेतन में से कटौतियाँ घटाना (Deductions from Gross Salary)

आयकर अधिनियम की धारा 16 के अन्तर्गत एक वेतनभोगी कर्मचारी के कर-योग्य वेतन की गणना करने के लिए सकल वेतन में से निम्न कटौतियाँ घटाई जाती हैं

(1) प्रमाणित कटौती (Standard Duduction ) – यह कटौती कर निर्धारण वर्ष 2019-20 से प्रत्येक वेतन प्राप्त कर्मचारी को प्रदान की जायेगी। प्रमाणित या मानक कटौती ₹40,000 तक मिलेगी।

(2) मनोरंजन भत्ते के सम्बन्ध में कटौती (Duduction regarding Entertainment Allowances)—सरकारी व गैर-सरकारी दोनों ही प्रकार के कर्मचारियों को प्राप्त मनोरंजन भत्ते की कटौती के सम्बन्ध में निम्न नियम है

(क) सरकारी कर्मचारियों को मनोरंजन भत्ते की कटौती- निम्न तीन रकमों में से जो सबसे कम होगी वह सकल वेतन में से घटा दी जायेगी (i) मनोरंजन भत्ते की वास्तविक प्राप्त रकम, या (ii) कर्मचारी के वेतन का 20% या 1/5 भाग, या (iii) अधिकतम राशि ₹5,0001 वेतन से आय-मनोरंजन भत्ते के लिए वेतन शब्द में केवल मूल वेतन को ही लिया जायेगा। कोई भी अन्य भत्ता इसमें शामिल नहीं करेंगे।

(ख) गैर-सरकारी कर्मचारियों को मनोरंजन भत्ते की कटौती-सरकारी कर्मचारियों को छोड़कर अन्य सभी कर्मचारियों को मनोरंजन भत्ते की कटौती प्राप्त नहीं होगी।

(3) रोजगार कर की कटौती (Duduction of Employment Tax)- इसे नियोजन कर या पेशे का कर या व्यवसाय कर भी कहते हैं। यदि किसी विधान या राज्य द्वारा कर्मचारियों के वेतन पर नियोजन या व्यवसाय कर के रूप में कोई राशि वसूल की जाती है तो करयोग्य वेतन की गणना करते समय उस वर्ष के सकल वेतन में से कर्मचारी द्वारा चुकायी गयी कर की राशि को घटाया जायेगा जिस वर्ष में कर्मचारी ने इसका वास्तव में भुगतान किया हो।

(C) कर योग्य वेतन की गणना करना (Computation of Taxable Salary) एक वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारी के, किसी कर निर्धारण के लिए, कर-योग्य वेतन की गणना करने से पूर्व कर्मचारी को प्राप्त होने वाली समस्त नकद प्राप्तियों, भत्तों एवं अनुलाभों को जोड़ा जाता है बशर्ते वे आयकर अधिनियम के अन्तर्गत करमुक्त न हो। इस प्रकार इन सभी मदों के योग अर्थात् सकल वेतन में से धारा 16 की उपर्युक्त कटौतियाँ घटाई जायेंगी। शेष रकम कर योग्य वेतन से आय होगी जिसे ‘वेतन’ शीर्षक की आय कहेंगे।