स्कन्ध प्रबन्ध से क्या आशय है ? स्कन्ध प्रबन्ध के उद्देश्यों की विवेचना कीजिए।

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स्कन्ध प्रबन्ध का आशय (Meaning of Inventory Management)

स्कन्ध या इनवेण्ट्री का आशय ऐसे प्रत्येक प्रकार के माल से है जो किसी व्यावसायिक उपक्रम द्वारा अपने सामान्य संचालन के लिए स्टॉक के रूप में रखा जाता है तथा जिसका उद्देश्य उसका विक्रय करना या बिक्री के लिए उत्पादित की जाने वाली वस्तुओं के निर्माण में उसका उपयोग करना होता है। स्कन्ध या सामग्री में ऐसे समस्त माल को सम्मिलित किया जाता है जिसकी प्रकृति स्थायी नहीं होती। सामान्यतः किसी उपक्रम के स्कन्ध को निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है

(1) कच्चे माल का स्कन्ध कच्चे माल के स्कन्ध में ऐसे माल को सम्मिलित किया जाता है, जिसके आधार पर निर्मित माल तैयार होता है; जैसे-सूती मिल में रुई, सिगरेट मिल में तम्बाकू, चीनी मिल में गन्ना, जूट मिल में जूट की गाँठे आदि।

(2) निर्माणाधीन या अर्द्ध-निर्मित माल का स्कन्ध इस प्रकार के स्कन्ध में ऐसे समस्त माल को सम्मिलित किया जाता है जो उत्पादन प्रक्रियाओं के विभिन्न चरणों में, अर्द्ध-निर्मित अवस्था में है तथा निर्मित माल के रूप में परिवर्तन नहीं हो सकता है जैसे सूती वस्त्र मिल में सूत, चीनी मिल में गन्ने का रस आदि।

(3) निर्मित माल का स्कन्ध-इसके अन्तर्गत ऐसे समस्त स्कन्ध को सम्मिलित किया जाता है जो उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाओं में होकर पूर्णतः निर्मित अवस्था में पहुँच जाता है तथा अन्तिम उपभोग के लिए तैयार होता है; जैसे-सूती वस्त्र मिल में कपड़ा, चीनी मिल में चीनी आदि।

(4) अन्य माल का स्कन्ध-अन्य माल के स्कन्ध में ऐसे समस्त माल को सम्मिलित किया जाता है जिसकी प्रकृति स्थायी नहीं होती और जो उपर्युक्त तीनों वर्गों में से किसी में नहीं आता है; जैसे-ईंधन, तेल, कोयला, लुब्रीकेटिंग आयल, रासायनिक पदार्थ आदि।

स्कन्ध प्रबन्ध से आशय कच्चे माल, अर्द्धनिर्मित माल तथा निर्मित माल की मात्रा एवं उनमें विनियोजित की मात्रा को नियन्त्रित करने से है, जिससे स्कन्ध के अभाव एवं आधिक्य की लागतों को समाप्त किया जा सके। दूसरे शब्दों में, स्कन्ध प्रबन्ध का आशय संस्था की संचालन आवश्यकताओं एवं वित्तीय साधनों को ध्यान में रखते हुए स्कन्ध का अनुकूलतम स्तर बनाये रखने से है।

स्कन्ध प्रबन्ध के उद्देश्य (Objectives of Inventory Management)

स्कन्ध प्रबन्ध के दो आधारभूत उद्देश्य है-प्रथम स्कन्ध विहीन की स्थिति से बचने के लिए समस्त स्कन्ध का पर्याप्त स्टॉक रखना तथा दूसरा, स्कन्ध की वहन लागतों को न्यूनतम करने के लिए स्कन्ध में अत्यधिक विनियोग से बचना है। अन्य शब्दों में, स्कन्ध प्रबन्ध का प्रमुख उद्देश्य स्कन्ध विहीन की लागत तथा इसके वहन करने की लागत को न्यूनतम करना है। इस प्रकार स्कन्ध प्रबन्ध के उद्देश्यों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है—

(1) ग्राहकों को श्रेष्ठ सेवा प्रदान करना।

(2) स्कन्ध के अत्यधिक विनियोग से बचना और वहन लागतों को न्यूनतम करना ।

(3) स्कन्ध विहीनता एवं उत्पादन में रुकावट से बचने के लिए आवश्यक मात्रा सामग्री की पूर्ति को निश्चित करना।

(4) सही समय पर अच्छी किस्म की पर्याप्त मात्रा में सामग्री उपलब्ध कराकर संस्था की निर्माण कुशलता में वृद्धि लाना। (5) स्कन्ध के असामान्य क्षयों तथा चोरी को रोकना।

(6) सामग्री के क्रय में मितव्ययता लाना।

स्कन्ध प्रबन्ध का महत्व (Importance of Inventory Management): स्कन्ध प्रबन्ध के महत्व को निम्न शीर्षकों के द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

(1) पूँजी के दुरुपयोग को रोकना-स्कन्ध प्रबन्ध स्कन्ध नियन्त्रण पूँजी के दुरुपयोग को रोककर पूँजी की आवश्यकता में वृद्धि करता है। स्कन्ध प्रबन्ध के माध्यम से किसी भी सामग्री मद का भौतिक स्कन्ध इतनी मात्रा में ही रखा जाता है जिससे उत्पादन व बिक्री के कार्य में रुकावट भी न आये एवं दूसरी ओर सामग्री के स्टॉक में न्यूनतम धन भी विनियोजित हो ।

(2) सामग्री संग्रहण की कुशल व्यवस्था करना-स्कन्ध प्रबन्ध सामग्री संग्रहण की भी व्यवस्था करता है जिससे क्षय एवं अप्रचलन की हानियाँ कम-से-कम हो जाती हैं।

(3) उत्पादन में होने वाली रुकावट को रोकना-स्कन्ध प्रबन्ध सामग्री की अधिकतम सीमा, न्यूनतम सीमा एवं पुनः आदेश बिन्दु के द्वारा ऐसी व्यवस्था करता है जिससे उचित गुण की सामग्री आवश्यक मात्रा में प्रत्येक स्टॉक में बनी रहे जिससे संस्था के उत्पादन कार्य में कोई व्यवधान न आये ।

(4) फर्म के कुल लाभों में वृद्धि करना-स्कन्ध प्रबन्ध के द्वारा सामग्री संग्रहण एवं भण्डारण लागत को कम-से-कम करने के साथ-साथ सामग्री को कम-से-कम लागत पर परिवहन एवं प्राप्ति की भी व्यवस्था की जाती है जिससे कि कुल लागत में कमी आती है और फर्म के कुल लाभों में वृद्धि हो जाती है।