फुटकर वितरण से आप क्या समझते है ? भारतीय अर्थव्यवस्था में इसका क्या महत्व है ?

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फुटकर व्यापारी का आशय एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Retailer) : What do you understand by retail distribution? What is its importance in the Indian economy? कि अन्तिम उपभोक्ता से अर्थ गृहस्थ को वस्तु या सेवा बेचने से लगाया जाता है। फुटकर व्यापारी वे व्यापारी हैं जो उत्पादक या थोक व्यापारियों से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में माल क्रय करके उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकता या माँग के अनुसार विक्रय करते हैं। फुटकर व्यापारी एक प्रकार से मध्यस्य का भी कार्य करते हैं जो कि उत्पादक या थोक व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं को अपनी सुझाव एवं सेवाएँ प्रदान करते हैं जिसके आधार पर उत्पादक उपभोक्ताओं की इच्छानुसार या पसन्द से वस्तु का निर्माण करते हैं तथा व्यावसायिक प्रतियोगिता के अन्तर्गत सफलता प्राप्त करते हैं। फुटकर व्यापारी की परिभाषा निम्न प्रकार से हैं

  • अमेरिकन मार्केटिंग एसोसिएशन के अनुसार, “एक फुटकर व्यापारी एक व्यवसायी है या कभी-कभी एजेण्ट होता है, जिसका मुख्य व्यवसाय अन्तिम उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप से विक्रय करना है।”
  • विलियम जे. स्टेन्टन के अनुसार, “एक फुटकर व्यापारी या फुटकर भण्डार एक ऐसा लिए व्यावसायिक उपक्रम है जो प्राथमिक रूप से अन्तिम उपभोक्ताओं को गैर व्यावसायिक प्रयोग के विक्रय करता है। “

उपर्युक्त के आधार पर यह कह सकते हैं कि फुटकर व्यापारी ऐसे व्यापारी हैं जो कि उत्पादक या थोक व्यापारी से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में माल खरीदते हैं और अन्तिम उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकतानुसार माल बेचते हैं। फुटकर व्यापारी वितरण वाहिका की अन्तिम कड़ी होते हैं। इनका ग्राहकों या उपभोक्ताओं से प्रत्यक्ष सम्पर्क होता है। दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली अनेक वस्तुओं का व्यवसाय फुटकर व्यापारी द्वारा किया जाता है।

फुटकर व्यापारियों की विशेषताएँ (Characteristics of Retailers) : फुटकर व्यापारियों की प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं

(i) फुटकर व्यापारी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में उत्पादक या थोक व्यापारी से माल खरीदते हैं।.

(ii) ये उपभोग के लिए वस्तुएँ अन्तिम उपभोक्ताओं को बेचते हैं।

(iii) ये प्रायः अनेक वस्तुओं का व्यापार करते हैं।

(iv) ये उपभोक्ताओं को वस्तु बेचने के साथ-साथ अनेक सेवाएँ भी प्रदान करते हैं, जैसे- गृह सुपुर्दगी, साख सुविधा, वस्तु का चुनाव आदि।

(v) फुटकर व्यापारियों का अन्तिम उपभोक्ताओं से सीधा सम्पर्क होता है।

(vi) फुटकर व्यापार में अपेक्षाकृत कम पूँजी की आवश्यकता होती है।

(vii) दुकान की स्थिति व सजावट पर अधिक बल दिया जाता है।

फुटकर व्यापारियों की सेवाएँ (Services of Retailers) : फुटकर व्यापारियों के कार्य या सेवाओं को निम्नलिखित दो भागों में विभाजित किया जाता है

(क) थोक व्यापारियों के प्रति सेवाएँ (Services to Wholesaler) फुटकर व्यापारी द्वारा थोक व्यापारियों के प्रति जिम्न सेवाएँ प्रदान की जाती है

(1) माल की बिक्री का प्रबन्ध-फुटकर व्यापारी माल की बिक्री का प्रबन्ध करते हैं जिससे थोक व्यापारी को उपभोक्ताओं को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में माल बेचने की परेशानी से मुक्ति मिल जाती है। फुटकर व्यापारी ही थोक व्यापारी से माल खरीदकर सीधे उपभोक्ता को पहुँचाता है।

(2) नवीन वस्तुओं का ज्ञान-फुटकर व्यापारी नवीन वस्तुओं का प्रचार या विज्ञापन काफी प्रभावशाली ढंग से करते हैं, क्योंकि इनका उपभोक्ताओं से सीधा व प्रत्यक्ष सम्पर्क होता है।

(3) स्थानीय विज्ञापन से मुक्ति-फुटकर व्यापारी स्थानीय विज्ञापन स्वयं करा लेते हैं। इससे थोक व्यापारियों को इस कार्य से मुक्ति मिलती है और उन्हें विज्ञापन पर व्यय नहीं करना पड़ता है।

(4) क्रेताओं के पसन्द की जानकारी फुटकर व्यापारी क्रेताओं के प्रत्यक्ष सम्पर्क में रहता है इसीलिए उसे उनकी रुचियों, रीति-रिवाज, फैशन, आदत आदि के सम्बन्ध में पूर्ण ज्ञान होता है। इस सम्बन्ध में वह थोक व्यापारियों को जानकारी देता है और थोक व्यापारी क्रेताओं की पसन्द के अनुसार ही उत्पादन क्रिया पूर्ण कराते हैं।

(5) उपभोक्ताओं से सम्पर्क की जरूरत नहीं थोक व्यापारी को ग्राहकों से सम्पर्क स्थापित करने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि वे अपना सम्पूर्ण कार्य फुटकर व्यापारी पर छोड़ देते हैं।

(ख) उपभोक्ताओं के प्रति सेवाएँ (Services to Consumers ) : उपभोक्ताओं के प्रति फुटकर व्यापारी निम्न सेवाएँ प्रदान करते हैं (1) ग्राहकों की रुचि व माँग का ज्ञान-फुटकर व्यापारी सर्वप्रथम उपभोक्ताओं की रुचि और माँग का अध्ययन करते हैं तथा ग्राहकों को उनकी रुचियों के अनुसार वस्तुएँ प्रदान करते हैं।

(2) सामाजिक सेवाएँ-फुटकर व्यापारी टिकाऊ वस्तु बेचते समय ग्राहकों को यह विश्वास दिलाते हैं कि यदि निश्चित समय के अन्दर वस्तु में कोई खराबी आ जाये तो वे उसकी मुफ्त मरम्मत करेंगे और इस निश्चित समय के पश्चात् उचित मूल्य पर मरम्मत सुविधाएँ उपलब्ध रहेंगी।

(3) निकटता होना-फुटकर व्यापारियों की सेवाओं के कारण उपभोक्ताओं को दूर जाने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि फुटकर व्यापारियों की दुकानें उपभोक्ताओं के निकट ही होती हैं।

(4) माल छाँटने में सुविधा-फुटकर व्यापारी विभिन्न किस्मों की वस्तुओं का व्यापार करते हैं जिसके कारण ग्राहकों को उनकी पसन्द की किस्म के अनुसार माल छाँटने की सुविधा दी जाती है।

(5) ग्राहकों के ज्ञान में वृद्धि-फुटकर व्यापारियों की दुकानें उपभोक्ताओं को वस्तुओं और उनके उपयोग के सम्बन्ध में समस्त जानकारी प्रदान करते हैं, जिनका ज्ञान उपभोक्ताओं को नहीं होता है।

(6) साख सुविधा-फुटकर व्यापारी अपने ग्राहकों को साख सुविधा अर्थात् उधार माल बेचते हैं।

(7) माल लौटाने की सुविधा-फुटकर व्यापारी ग्राहकों को यह भी सुविधा देते हैं कि यदि माल पसन्द आये तो उसे तुरन्त वापस कर सकते हैं। इससे ग्राहकों को भी सन्तोष होता है कि माल पसन्द न आने पर उसको हानि नहीं उठानी पड़ेगी अर्थात् उसका माल वापस हो जायेगा।

(8) निःशुल्क सलाह-फुटकर व्यापारी ग्राहकों को वस्तु के सम्बन्ध में मुफ्त परामर्श देते हैं।

(9) ताजी वस्तुएँ प्रदान करना-फुटकर व्यापारी दैनिक उपयोग की वस्तुओं को अधिक बेचते है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं में कुछ ऐसी वस्तुएँ शामिल की जाती हैं जिनको कि फुटकर व्यापारी कम मात्रा में क्रय करता है ताकि सभी वस्तुएँ उसी दिन आसानी से बिक जायें, जैसे-दूध, सब्जी आदि। अतः फुटकर व्यापारी उपभोक्ताओं को ताजी वस्तुएँ प्रदान करता है।

(10) मौसमी वस्तुएँ उपलब्ध कराना-फुटकर व्यापारी उपभोक्ताओं को मौसम के अनुसार माँगी गई सभी वस्तुओं को उपलब्ध कराते हैं। उपभोक्ताओं की माँग का उनको पूर्व ज्ञान होता है, जिसके अनुसार वे वस्तुओं को उपलब्ध कराते हैं। मौसम के अनुसार उपयोग की जाने वाली वस्तुओं का भी पहले से ही इन्तजाम कर लेते हैं।