प्रत्यक्ष डाक विज्ञापन से आप क्या समझते है ? इसके गुण-दोषों को समझाइये।

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प्रत्यक्ष डाक विज्ञापन का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Direct Mail Advertising)

डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन, विज्ञापन की यह विधि है, जिसमें विज्ञापन अपने सम्भावित ग्राहकों को मुद्रित, लिखित या चित्रित सामग्री भेजता है, ताकि उन्हें अपने माल के क्रय करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इस विज्ञापन सामग्री में पत्र, गश्त पत्र, मूल्य सूचियाँ, आदेश फॉर्म आदि सम्मिलित होते हैं। चूँकि यह विज्ञापन सामग्री विक्रय साहित्य है, इसलिए डाक द्वारा विज्ञापन को विक्रय साहित्य द्वारा विज्ञापन भी कहते हैं।

  • रिचर्ड मैस (Richard Messner) के अनुसार, “डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन एक विज्ञापक का स्थायी रूप से मुद्रित, लिखित या चित्रित रूप में संदेश होता है जिसका चुने हुए व्यक्तियों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से नियन्त्रित वितरण किया जाता है।”
  • केसल्स (Cassels) के अनुसार, “डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन में लैटर बॉक्स का प्रयोग कर सही व्यक्तियों को सही वस्तु के बारे में, सही समय पर सूचित किया जाता है।”
  • नाइस्ट्रॉम (Nystrom) के अनुसार, “डाक द्वारा प्रत्यक्ष रूप से सम्भावित ग्राहकों को विज्ञापन सामग्री भेजना डाक प्रत्यक्ष विज्ञापन कहलाता है।”

डाक द्वारा विज्ञापन करने में सर्वप्रथम एक डाक सूची तैयार करनी पड़ती है। यह डाक सूची यातायात विभाग, ट्रेड डायरेक्टरी, सरकारी कर्मचारियों की नामावली आदि से तैयार की जा सकती है। प्रोफेसरों की सूची विश्वविद्यालय के कार्यालय या शिक्षा विभाग से प्राप्त की जा सकती है। डाक सूची तैयार करके विज्ञापन सम्बन्धी साहित्य इन नामों पर भेजे जा सकते हैं। डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन के साधन या विभिन्न रूप

(1) विक्रय-पत्र (Sales Letter) – विक्रय पत्र कुछ निश्चित सम्भावित ग्राहकों को ही लिखे जाते हैं। इन ग्राहकों में घरेलू उपभोक्ता तथा व्यापारी दोनों ही हो सकते हैं जिन्हें विक्रय-पत्र भेजना होता है उनके नाम डाक सूची में से छाँट लिये जाते हैं।

विक्रय-पत्र प्रत्येक संस्था तथा व्यक्ति को अलग से दिये जाते हैं। इन पत्रों की भाषा समान होना आवश्यक नहीं है। ये इस प्रकार की भाषा में लिखे जाते हैं कि पाठक शीघ्र ही संस्था की वस्तुओं के प्रति आकर्षित हो जायें। संक्षेप में, विक्रय पत्रों में वे सभी गुण पाये जाते है जो एक प्रभावशाली व्यावसायिक पत्र में पाये जाते हैं।

(2) गश्ती पत्र (Circular Letter) गश्ती पत्र वे विक्रय पत्र हैं जिनमें समान प्रकार की विषय-वस्तु का समावेश होता है तथा जो कई सम्भावित ग्राहकों को भेजे जाते हैं। गश्ती पत्र में आन्तरिक पते के अतिरिक्त सब-कुछ छपा होता है। कभी-कभी आन्तरिक पते के लिए स्थान छोड़ दिया जाता है, तो कभी-कभी आन्तरिक पता लिखा ही नहीं जाता है।

गश्ती पत्र सुन्दर छपे हुए होने चाहिए। इन गश्ती पत्रों के साथ क्रयादेश फॉर्म तथा जवाबी कार्ड संलग्न कर दिये जाने चाहिए।

गश्ती पत्रों एवं विक्रय पत्रों में महत्वपूर्ण अन्तर इतना ही होता है कि गश्ती पत्रों में प्रत्येक पत्र की विषय-वस्तु समान होती है जबकि विक्रय पत्रों की विषय-वस्तु भिन्न हो सकती है तथा गश्ती पत्र प्रायः मुद्रित होते हैं, जबकि विक्रय पत्रों की विषय-वस्तु भिन्न हो सकती है तथा गश्ती पत्र प्रायः मुद्रित होते हैं, जबकि विक्रय पत्र मुद्रित नहीं होते।

(3) पत्रक तथा फोल्डर आदि (Leaflets and Folder etc.)-पत्रक तथा फोल्डर भी डाक द्वारा विज्ञापन की सामग्री है। पत्रक में वस्तुओं के सम्बन्ध में संक्षिप्त विवरण तथा प्रयोग विधि दी हुई होती है। इन पत्रों को मोड़ दिया जाये तो ये फोल्डर कहलाते हैं।

(4) केटलॉग (Catalogue)-केटलॉग में विज्ञापन द्वारा विक्रय के लिए प्रस्तुत विभिन्न वस्तुओं के मूल्य तथा उसका ब्यौरा दिया होता है। इसमें प्रायः यथास्थान चित्र दिये जाते हैं तथा सम्भावित ग्राहकों के लिए माल के क्रय सम्बन्धी नियम दिये होते हैं। यह प्रायः एक संस्था की वस्तुओं का विस्तृत विवरण प्रदान कर देता है, जो एक सीमा तक विक्रयकर्ताओं की आवश्यकता को समाप्त कर देता है।

(5) मूल्य सूची (Price List)-मूल्य सूची में केवल वस्तुओं के मूल्यों का उल्लेख होता है। केटलॉग की भाँति इसमें वस्तुओं के विवरण या चित्र नहीं होते हैं।

(6) पुस्तिकाएँ (Booklets)-डाक द्वारा विज्ञापन का एक साधन पुस्तिकाएँ भी हैं। पुस्तिकाएँ किसी वस्तु के सम्बन्ध में विस्तृत विवरण देती है। उदाहरणार्थ, स्कूटर की कार्यप्रणाली, सिलाई मशीन की कार्यप्रणाली व उसके विशेष विवरणयुक्त कई पुस्तिकाएँ देखने को मिलती है।

द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन के उद्देश्य डाक डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन का प्रमुख उद्देश्य ग्राहकों को दुकान या शोरूम पर न बुलाकर उनके घर पर ही डाक द्वारा प्राप्त आदेशों की वस्तुओं को पहुँचाना होता है। डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन के उद्देश्यों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है

(1) ग्राहकों से डाक द्वारा आदेश प्राप्त करना।

(2) नवीन वस्तुओं से सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी प्रदान करना।

(3) निर्माता एवं ग्राहकों के मध्य अच्छे सम्बन्ध स्थापित करना।

(4) सम्भावित ग्राहकों को शिक्षा प्रदान करना।

(5) विक्रयकर्त्ताओं के मार्ग को प्रशस्त करना।

(6) विज्ञापन सम्बन्धी बातें विशिष्ट व्यक्ति तक सीमित रखना।

(7) वस्तु की माँग में वृद्धि करना एवं नवीन माँग उत्पन्न करना।

(8) वस्तु की किस्म, उपयोग एवं प्रयोग की विधि बताना।

(9) स्थानापन्न वस्तुओं को हतोत्साहित करना।

(10) उपभोक्ताओं को व्यक्तिगत रूप से आकर्षित करना।

डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन की विशेषताएँ

(1) इस प्रकार के विज्ञापन द्वारा ग्राहकों से व्यक्तिगत सम्पर्क स्थापित किया जाता है। (2) इस प्रकार के विज्ञापन में आकर्षक चित्रों एवं रंगों का प्रयोग किया जाता है।

(3) डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन से क्रेता एवं विक्रेता के समय की बचत होती है। (4) डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन में अधिक विषय सामग्री प्रदान की जाती है।

(5) डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन ग्राहकों को स्थायी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। (6) डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन से ग्राहकों को अभिनव भेंट प्राप्त होती है।

(7) डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन सन्देश को वैयक्तिक स्पर्श प्रदान करता है। (8) डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन केवल प्रमापित वस्तुओं के लिए ही उपयुक्त होता है।

डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन के लाभ डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित है

1. विशिष्ट व्यक्तियों में विज्ञापन-डाक द्वारा कुछ व्यक्तियों को विज्ञापन संदेश पहुँचाया जा सकता है। उदाहरणार्थ, पुस्तक व्यवसायी नई पुस्तकों की प्राप्ति पर सम्बन्धित विषय के प्राध्यापकों को पुस्तकों का विज्ञापन भेज सकता है।

2. प्रतिस्पर्द्धा से मुक्ति-डाक द्वारा विज्ञापन करने वाली संस्था को प्रतिस्पर्द्धा संस्थाओं के विज्ञापनों से प्रतिस्पर्द्धा नहीं करनी पड़ती है। पत्रिका एवं समाचार-पत्रों में विज्ञापन देने पर इनके प्रकाशित अन्य विज्ञापनों से भारी प्रतिस्पर्द्धा करनी पड़ती है।

3. विभिन्न रंगों एवं चित्रों का प्रयोग-चूँकि सभी विज्ञापन सामग्री द्वारा तैयार करवाई जाती है, अतः विज्ञापक विज्ञापन सामग्री में विभिन्न रंगों एवं चित्रों का प्रयोग कर उसे अधिक आकर्षक बनवा सकता है और विज्ञापन की प्रभावशीलता में वृद्धि की जा सकती है।

4. गोपनीयता-व्यवसाय में गोपनीयता परम आवश्यक होती है। यह गुण विज्ञापन के इस माध् यम में भी पाया जाता है। जिस व्यक्ति के पास विज्ञापन सामग्री भेजी जाती है वह उसी व्यक्ति को प्राप्त होती है और उस विज्ञापन की बातें उस व्यक्ति विशेष तक प्रायः सीमित रहती है।

5. मितव्ययिता- विज्ञापन का यह माध्यम बहुत ही मितव्ययी साधन है। सीमित व्यावसायिक क्षेत्र एवं सम्भावित ग्राहकों वाली संस्था के लिए यह माध्यम बहुत ही उपयुक्त रहता है।

6. प्रत्यक्ष क्रय को प्रोत्साहन-जब निर्माता एक व्यक्ति को डाक द्वारा विज्ञापन की सामग्री भेजता है तो सम्भव है कि वह व्यक्ति उस निर्माता को माल आदेश भी भेज दे। इससे प्रत्यक्ष क्रय को प्रोत्साहन मिलता है।

7. विस्तृत संदेश-डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन का एक लाभ है कि इस माध्यम से अधिक लम्बे एवं विस्तृत संदेश दिये जा सकते हैं।

8. लोचशील- विज्ञापन का यह माध्यम काफी लोचशील है। विज्ञापन जिस ढंग से चाहे आसानी से इसमें परिवर्तन कर सकता है।

9. यथासमय विज्ञापन-चूँकि विज्ञापन के इस माध्यम पर विज्ञापक का पूर्ण नियन्त्रण रहता है, अतः वह समय पर सम्भावित ग्राहकों को विज्ञापन संदेश पहुँचा सकता है।

10. अनुवर्तन एवं पूछताछ में सुगमता-डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन प्रेषित करने पर यदि विज्ञापन सामग्री प्राप्तकर्ता (सम्भावित) कोई भी उत्तर न दे तो उसका अनुवर्तन (Follow up) किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त यदि सम्भावित ग्राहक कुछ पूछताछ करना चाहे तो उसका जवाब देना सरल हो जाता है।

डाक द्वारा विज्ञापन के दोष

डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन के जहाँ एक ओर कुछ लाभ है, वहाँ इसके कुछ दोष भी हैं, जिन्हें निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है

1. विज्ञापन सामग्री को बिना पढ़े फाइल करना कई बार देखा जाता है कि डाक द्वारा प्राप्त विज्ञापन सामग्री को बिना पढ़े ही फाइल कर दिया जाता है, कभी-कभी तो इसे फाइल भी नहीं किया जाता है। जैसे ही डाक द्वारा ऐसी विज्ञापन सामग्री आती है वैसे ही उसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है।

2. विज्ञापन सामग्री का प्राप्तकर्ता के पास नहीं पहुँचना-कई बार डाक विभाग की लापरवाही के कारण विज्ञापन सामग्री प्राप्तकर्ता के पास नही पहुँच पाती है, बल्कि रास्ते में ही वह किसी अन्य के हाथ पड़ जाती है या डाक विभाग की रद्दी की टोकरी में चली जाती है।

3. अल्प जीवन- डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन का जीवन भी प्रायः छोटा ही होता है। केटलॉग तथा मूल्य सूची को छोड़कर अन्य विज्ञापन सामग्री को लोग पढ़कर शीघ्र ही रद्दी की टोकरी में फेंक देते हैं।

4. डाक सूचियों में कठिनाइयाँ डाक द्वारा प्रत्यक्ष विज्ञापन के लिए डाक सूचियाँ बनाना कठिन होता है। उससे भी कठिन उन सूचियों को नवीनतम बनाये रखना होता है। कई लोग पता बदल लेते है, इससे बड़ी कठिनाई होती है।

5. खर्चीला जब ग्राहकों की संख्या अधिक हो और ग्राहकों की सूची में कुछ कमियाँ या गलतियाँ होती है तो विज्ञापन का यह माध्यम बड़ा खर्चीला पड़ जाता है।

6. सीमित सम्पर्क इस माध्यम से विज्ञापन करने पर सीमित संख्या में ही ग्राहकों से सम्पर्क स्थापित किया जा सकता है।