सामग्री नियन्त्रण से आप क्या समझते है ? इसकी प्रकृति, आवश्यकता, वर्गीकरण एवं उद्देश्यों की विवेचना कीजिए।

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सामग्री तालिका नियन्त्रण का अर्थ एवं परिभाषाएँ (Meaning and Definitions of Inventory Control)

सामग्री तालिका नियन्त्रण न्यूनतम लागत पर सामग्री के उचित स्तरों के अनुरक्षण की एक तकनीक है, जिसके प्रयोग से पूँजी की आवर्तनशीलता (Capital Turnover) में वृद्धि होती है। वास्तव में सामग्री तालिका नियन्त्रण सामग्री के भौतिक एवं वित्तीय पहलुओं का नियन्त्रण है। शेरलेकर एवं शेरलेकर के अनुसार, “सामग्री तालिका नियन्त्रण से आशय स्टोर में रखी सामग्रियों पर नियन्त्रण रखने से है।”

  • जॉन बरबिज के अनुसार, “सामग्री सूची नियन्त्रण, पूर्व निर्धारित स्तर पर सुरक्षित सीमाओं के अधीन सामग्री की मात्राओं एवं मौद्रिक मूल्यों के नियन्त्रण से सम्बन्धित है।”
  • के. के. गुप्ता के अनुसार, “सामग्री तालिका नियन्त्रण एक ऐसी प्रविधि है जिसके द्वारा उचित मात्रा में सामग्री की प्राप्ति सुनिश्चित की जाती है ताकि निर्माण कार्यों हेतु पर्याप्त सामग्री सदैव उपलब्ध रहे एवं साथ ही उसका अनावश्यक संग्रहण भी न हो।”

सामग्री तालिका नियन्त्रण की प्रकृति (Nature of Inventory Control)

(1) सामग्री सम्बन्धी हानियों को कम करके तथा न्यूनतम लागत पर सामग्री के उचित स्तरों का अनुरक्षण करके सामग्री तालिका नियन्त्रण लागतों को कम करता है और पूंजी की आवर्तनशीलता (Capital Turnover) को बढ़ता है।

(2) सामग्री तालिका नियन्त्रण द्वारा सभी उद्देश्यों में सामंजस्य रखते हुए वांछित मात्रा में सामग्रियों का अनुरक्षण किया जाता है।

(3) यह सामग्रियों का भौतिक नियन्त्रण है। इसमें वांछित सामग्रियों की सही किस्म को वांछित मात्रा में बनाये रखने का प्रयास किया जाता है। इससे अभाव या आधिक्य की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

(4) सामग्री तालिका नियन्त्रण उत्पादन, नियोजन एवं नियन्त्रण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

(5) सामग्री तालिका नियन्त्रण द्वारा न्यूनतम विनियोग लागत पर सामग्री का अनुरक्षण किया जाता है।

(6) सामग्री तालिका नियन्त्रण एक प्रबन्धकीय उपकरण है जिसके द्वारा सामग्री के स्टॉक को समुचित स्तर पर बनाये रखकर उत्पादन को निर्वाध रूप से चालू रखा जा सकता है।

सामग्री तालिका की आवश्यकता (Need for Inventory)

उद्योगों में सामग्री तालिका की आवश्यकता मुख्यतः निम्नलिखित कारणों से होती है (1) उत्पादन पंक्ति में सन्तुलन, (2) फालतू समय की लागत में कमी (3) पूँजी की आवर्तनशीलता, (4) रोजगार स्थायित्व, (5) मौसमी उतार-चढ़ाव व परिवर्तनों से सुरक्षा, (6) उत्पादन प्रक्रिया का निर्वाध संचालन सामग्री तालिका का वर्गीकरण (Classification of Inventory)

औद्योगिक संस्थाओं द्वारा तैयार की जाने वाली सामग्री तालिका में सम्मिलित मर्दों का वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया जा सकता है

(1) कच्ची सामग्री (Raw Material).

(2) अर्द्ध-निर्मित माल (Semi-Finished Products)-इससे आशय ऐसे माल से है जिस पर कुछ निर्माण कार्य किया जा चुका है, लेकिन सुपुर्दगी के लिए कुछ निर्माण कार्य और किया जाना शेष है।

(3) निर्मित माल (Finished Product)- यह पूर्णतः निर्मित और सुपुर्दगी योग्य होता है और उस पर कोई निर्माण प्रक्रिया शेष नहीं रहती।

(4) अवर्गीकृत सामग्री (Unclassified Materials)-जिन सामग्रियों की किन्हीं विशेषताओं के आधार पर वर्गीकृत नहीं किया जाता, इस वर्ग में सम्मिलित की जाती है।

(5) पुनरात्मक सामग्री ( Repetitive Materials) इसमें नियमित रूप से उत्पादन में प्रयुक्त सामग्री सम्मिलित है, जिसका पर्याप्त स्टॉक रखा जाता है।

(6) अपुनरात्मक सामग्री (Non-Repetitive Material)-इन्हें विशिष्ट उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ही क्रय किया जाता है। इनका नियमित स्टॉक नहीं रखा जाता।

(7) निस्तारण सामग्री (Disposal Materials)- इस वर्ग में उत्पादन प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले अवशिष्ट उत्पादों, कतरनों, छिल्कों आदि को सम्मिलित किया जाता है।

(8) आपूर्तियाँ (Supplies) ऐसी आपूर्तियों कार्यालय एवं परिचालन सम्बन्धी हो जाती है, जैसे-कागज, पेन, पेन्सिल, लिफाफे आदि स्टेशनरी (कार्यालय आपूर्तियाँ) एवं ग्राइंडिंग व्हील्स, ऑयल, डीजल, ग्रीस, केमिकल्स आदि (परिचालन आपूर्तियों)।

(9) औजार (Tools) – इससे आशय उत्पादन कार्य के लिए प्रयुक्त विभिन्न औजार, जैसे-हथौड़ा, आरी, ड्रिल, संडासी, काटने व ढालने के विभिन्न औजार आदि।

(10) खरीदे गये हिस्से (Purchased Parts)-ऐसे पुर्जे जिन्हें निर्माता स्वयं न बनाकर सीधे ही बाजार से क्रय करके काम में लेता है।

सामग्री तालिका नियन्त्रण के उद्देश्य (Objects of Inventory Control) सामग्री तालिका नियन्त्रण के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित है

(1) सामग्री में विनियोजित पूँजी को न्यूनतम करना-सामग्री सूची नियन्त्रण के माध्यम से यह प्रयास किया जाता है कि आवश्यक सामग्रियों का इतना ही स्टॉक रखा जाये, ताकि उत्पादन व विक्री के कार्य में कोई रुकावट भी न आये तथा सामग्री के स्टॉक में न्यूनतम धन भी विनियोजित हो, जिससे पूँजी की उत्पादकता में वृद्धि हो सके। इस प्रकार सामग्री सूची नियन्त्रण के द्वारा सामग्री में विनियोजित की जाने वाली पूँजी की न्यूनतम किया जाता है।

(2) सामग्री लागत को न्यूनतम करना-सामग्री सूची नियन्त्रण के द्वारा उचित मात्रा में ही सामग्री मदों का स्टॉक रखा जाता है, जिससे सामग्री वहन लागतें (Materials Holding Costs) न्यूनतम आती हैं। इसके साथ-साथ प्रभावी सामग्री सूची नियन्त्रण, न्यूनतम सेवा लागत पर सामग्री की परिवहन, नौवहन एवं प्राप्ति की भी कुशलतम व्यवस्था करता है। परिणामस्वरूप सामग्री की कुल लागत में कमी आती है।

(3) सामग्री संग्रहण की कुशल व्यवस्था करना-सामग्री सूची नियन्त्रण का उद्देश्य सामग्री संग्रहण की कुशल व्यवस्था करना भी है, ताकि सामग्री क्षय, छीजन, छुट-पुट चोरी एवं अप्रचलन की हानियों को न्यूनतम किया जा सके।

(4) उत्पादन में अवरुद्धता होने से रोकना-सामग्री सूची नियन्त्रण के अन्तर्गत मितव्ययी आदेश मात्रा, सुरक्षा स्टॉक, अधिकतम सीमा, पुनः आदेश बिन्दु का निर्धारण पर्याप्त विश्लेषण के उपरान्त किया जाता है। परिणामस्वरूप सामग्री के अभाव या आधिक्य की स्थिति उत्पन्न न होने के कारण उत्पादन में अवरुद्धता का प्रश्न ही नहीं उठता।

(5) सामग्री अधिप्राप्ति कार्य में सहयोग प्रदान करना-सामग्री सूची नियन्त्रण सामग्री अधिप्राप्ति कार्य में भी सहयोग प्रदान करता है, जिससे वांछित किस्म की सामग्री उचित मूल्य पर मितव्ययी ढंग से क्रय की जा सके।

(6) सामग्री आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाना-सामग्री सूची नियन्त्रण का उद्देश्य उत्पादन नियोजन को ध्यान में रखते हुए सामग्री आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाना भी है।

(7) ग्राहकों को उत्तम सेवा प्रदान करना-सामग्री-सूची नियन्त्रण के द्वारा उचित किस्म की सामग्री का उचित मात्रा में भण्डारण किया जाता है, जिससे उत्पादन में कोई अवरोध उत्पन्न नहीं होता। उत्पादन निर्विघ्न रूप से चलते रहने के कारण ग्राहकों को सही समय पर सही किस्म की वस्तु सही कीमत पर उपलब्ध कराना सम्भव होता है। इस प्रकार सामग्री सूची नियन्त्रण के द्वारा ग्राहकों को श्रेष्ठतम सेवाएँ प्रदान की जाती है।