विपणन मिश्रण से क्या आशय है ? विपणन मिश्रण के प्रमुख तत्वों की विवेचना कीजिए।

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विपणन मिश्रण से आशय एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Marketing Mix) : एक विपणन प्रबन्धक विपणन मिश्रण की सहायता से विपणन कार्यक्रम तैयार करता है जिससे कि फर्म का शुद्ध लाभ बढ़े एवं ग्राहकों को अधिकतम सन्तुष्टि मिल सके। विपणन मिश्रण से आशय ऐसे श्रेष्ठ निर्णयों के मिश्रण से है, जो विक्रय को लाभप्रद रूप से प्रोत्साहित करते हैं तथा उपभोक्ताओं के लिए अधिकतम सन्तुष्टि का साधन बनते हैं विक्रय में सफलता प्राप्त करने के लिए विक्रय की विभिन्न नीतियों का जो सम्मिश्रण किया जाता है, वह विपणन मिश्रण कहलाता है।

  • (1) आर. एस. डावर (RS. Davar) के अनुसार, “निर्माताओं द्वारा बाजार में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रयोग की जाने वाली नीतियाँ विपणन मिश्रण का निर्माण करती हैं।”
  • (2) फिलिप कोटलर (Philip Kotler) के अनुसार, “एक फर्म का कार्य अपने विपणन चलों के लिए सर्वोत्तम विन्यास को ढूंढ़ना है। यह विन्यास विपणन मिश्रण कहलाता है।”
  • (3) विलियम जे. स्टेण्टन (William J. Stanton) के अनुसार, “विपणन मिश्रण एक ऐसा शब्द है जिसका उपयोग किसी कम्पनी की विपणन प्रणाली को निर्मित करने वाली चार आयतों-उत्पाद, कीमत ढाँचा, सम्बर्द्धन क्रियाएँ एवं वितरण व्यवस्था के संयोजनों का वर्णन करता है।”
  • (4) के. के. गुप्ता (K. K. Gupta) के अनुसार, “विपणन मिश्रण से आशय उन समस्त क्रियाओं, विधियों, नीतियों व्यूह रचनाओं एवं औजारों से संयोजन से है जिनका उपयोग विपणन संस्था द्वारा ग्राहकों की आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने एवं अपने विपणन उद्देश्यों के सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए किया जाता है।

उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि “विपणन मिश्रण विक्रय की विभिन्न नीतियों को मिलाकर बनता है, जिससे विक्रय में पूर्ण सफलता प्राप्त हो सके। विपणन मिश्रण विपणन रीति नीति का एक भाग माना जाता है।”

विपणन मिश्रण की विशेषताएँ (Characteristics of Marketing Mix) विपणन मिश्रण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

1. यह विपणन की विभिन्न क्रियाओं, विधियों, नीतियों, व्यूह रचनाओं एवं औजारों का मिश्रण है।

2. इसमें चार तत्वों अर्थात् उत्पाद, कीमत, सम्बर्द्धन तथा स्थान का मिश्रण है।

3. यह एक सतत् प्रक्रिया है क्योंकि इसमें समय एवं परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन करना पड़ता है।

4. विपणन मिश्रण का निर्धारण करना विपणन प्रबन्धक का एक महत्वपूर्ण कार्य है।

5. यह विपणन समस्याओं के समाधान में सहायक है।

6. विपणन मिश्रण द्वारा ग्राहकों की आवश्यकताओं को सन्तुष्ट किया जाता है।

विपणन मिश्रण में परिवर्तन (Change in Marketing Mix) एक बार जब विपणन मिश्रण का निर्धारण कर लिया जाता है तो फिर उसमें समय एवं परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन करते रहना चाहिए। इस परिवर्तन को विपणन मिश्रण में परिवर्तन कहते हैं। यह परिवर्तन निम्न कारणों से किये जाते हैं

1. प्रतियोगिता की स्थिति का सामना करने हेतु।

2. उपभोक्ता की बदलती हुई प्रवृत्ति ।।

3. देश के कानून के कारण किये जाते हैं।

4. ब्राण्ड अथवा ट्रेडमार्क बदल दिया जाता है।

5. मूल्यों व नीतियों में परिवर्तन कर दिये जाते हैं।

6. बट्टे की नीति अपनायी जाने लगती है।

7. वितरण मार्गों में परिवर्तन कर दिया जाता है।

8. उपभोक्ता को गारण्टी सेवा दी जाने लगती हैं।

विपणन मिश्रण को प्रभावित करने वाली शक्तियाँ या घटक (Factors Affecting the Marketing Mix) विपणन मिश्रण को प्रभावित करने वाले घटकों को अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से दो भागों में विभक्त किया गया है, जो निम्न प्रकार से हैं

(क) बाजार सम्बन्धी घटक (Factors Related to Market) बाजार सम्बन्धी घटकों के अन्तर्गत ऐसे घटकों का समावेश किया जाता है जिन पर संस्था का नियन्त्रण नहीं होता है, किन्तु ये घटक संस्था की बाजार क्रियाओं को प्रभावित करते हैं। ये घटक निम्नलिखित हैं

(1) उपभोक्ता की बदलती प्रकृति-यह विपणन मिश्रण को प्रभावित करने वाला प्रमुख घटक है। वर्तमान समय में उपभोक्ताओं की प्रवृत्ति में शीघ्र परिवर्तन आ जाता है। यदि एक बार विपणन मिश्रण तय कर लिया गया हो और उपभोक्ता की रुचि या आदत या फैशन बदल जाय, तो विपणन मिश्रण में परिवर्तन करना पड़ेगा।

(2) राजकीय नियन्त्रण-वर्तमान में विपणन सम्बन्धी क्रियाओं पर सरकारी नियन्त्रण बढ़ता जा रहा है जिससे कि विपणन मिश्रण प्रभावित होता है। विपणन मिश्रण का निर्धारण करने से पूर्व विपणन प्रबन्धक को समस्त राजकीय नीतियों का अध्ययन कर लेना चाहिए।

(3) प्रतियोगिता-विपणन प्रबन्धक को विपणन मिश्रण का निर्धारण करने के पहले प्रतियोगिता के सम्बन्ध में अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि विपणन प्रबन्धक का प्रतियोगिता पर कोई नियन्त्रण नहीं होता परन्तु प्रतियोगिता के कारण विपणन मिश्रण प्रभावित होता है.

(4) वितरण प्रणाली का प्रारूप-विपणन मिश्रण तैयार करने के पूर्व वितरण प्रणाली के प्रारूप का भी भलीभाँति अध्ययन विपणन प्रबन्ध को करना चाहिए जिसमें वितरण व्यवस्था के स्वरूप, वितरणों के स्वभाव तथा उनके व्यवहार का भली-भाँति अध्ययन कर लेना चाहिए। वितरक व उपभोक्ता के मध्य प्रत्यक्ष सम्पर्क रहता है। अतः उनके मनोबल, व्यवहार, वस्तुओं के प्रति दृष्टिकोण एवं उनकी कार्य विधि का उपभोक्ता वर्ग पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। इसीलिए विपणन प्रबन्धक को समस्त बातों पर विचार कर लेना चाहिए।

(ख) विपणन सम्बन्धी घटक (Factors Related to Marketing) बाजार सम्बन्धी घटकों के अतिरिक्त कुछ विपणन सम्बन्धी घटक भी होते हैं जोकि मिश्रण के निश्चयन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। ये ऐसे घटक होते हैं, जिन पर नियन्त्रण रखकर विपणन प्रबन्धक अपने विवेक तथा बुद्धि के अनुसार निर्णय ले सकता है। इसके विपणन सम्बन्धी घटक निम्न है

(1) विज्ञापन नीति-विपणन क्षेत्र में विज्ञापन नीति का प्रयोग ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किया जाता है। विपणन प्रबन्धक को विज्ञापन नीति के अन्तर्गत विज्ञापन के उद्देश्य, क्षेत्र, माध्यम, विज्ञापन व्ययों का पूर्वानुमान तथा विज्ञापन व्ययों पर नियन्त्रण रखने से सम्बन्धित निर्णयों का पूर्ण अध्ययन कर लेना चाहिए।

(2) ब्राण्ड नीति-वर्तमान युग में प्रतिष्ठित कम्पनियाँ अपने उत्पादों को विशेष ब्राण्ड या चिन्ह प्रदान करती है, जिससे कि उनके उत्पाद में विशिष्टता उत्पन्न हो सके। उत्पादक को ब्राण्ड नीति के अन्तर्गत ब्राण्ड का नाम, व्यापार चिन्ह तथा अन्य बातों का निश्चय किया जाना चाहिए। प्रबन्धक इसके अन्तर्गत वैकल्पिक नीति भी अपना सकता है। अनेक उत्पादों के सम्बन्ध में एक ही ब्राण्ड का निर्धारण कर सकता है या अलग-अलग किस्म के उत्पादों के लिए अलग-अलग ब्राण्ड निश्चित कर सकता है।

(3) संवेष्ठन नीति-यदि वस्तुओं की पैकिंग आकर्षक हो तो उससे भी ग्राहक प्रभावित होकर वस्तुओं का क्रय करते हैं। अतः प्रबन्धक को उत्पाद के पैकिंग के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण व सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए।

(4) उत्पादन नियोजन- किसी भी वस्तु एवं सेवाओं का उपयोग उपभोक्ता अपनी सन्तुष्टि के लिए करता है जिसके लिए उत्पादक को भी अपनी वस्तुओं में वह गुणवत्ता लानी पड़ती है ताकि ग्राहक सन्तुष्ट हो सके, इसके लिए उसे उत्पाद नियोजन को अपनाना चाहिए।

(5) व्यक्तिगत विक्रय-विपणन प्रबन्धक व्यक्तिगत विक्रय पद्धति का प्रयोग करके विक्रेताओं की भर्ती, प्रशिक्षण और उनके संगठन के बारे में विभिन्न व्यवस्था कर विपणन मिश्रण प्रणाली को उत्तम बना सकता है।

(6) वितरण माध्यम-विपणन प्रबन्धक को वितरण के स्वभाव, उनकी आवश्यकता, मनोबल एवं उनका वस्तु के प्रति दृष्टिकोण का अध्ययन करने के पश्चात् ही माध्यम का चुनाव करना चाहिए।

(7) विशेष नीति-विपणन प्रबन्धक को समय-समय पर विशेष विक्रय वृद्धि हेतु आवश्यक कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए जिससे वस्तु की माँग में वृद्धि हो सके।

निष्कर्ष उपर्युक्त घटकों की विवेचनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि विपणन प्रबन्धक की सूझ-बूझ व दूरदर्शिता के आधार पर एक उचित विपणन मिश्रण का निर्माण किया जा सकता है। अतः इसके लिए आवश्यक कि वह अपनी बुद्धि, विवेक तथा पूर्व अनुभव के आधार पर विपणन मिश्रण के अन्तर्गत समस्त घटकों का समावेश करे तथा विपणन अनुसंधान का सफलतापूर्वक उपयोग करे।