भारत माता कविता के आधार पर पंतजी की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।

14

उत्तर – कवि सुमित्रानन्दन पंत छायावाद के प्रमुख स्तम्भों में से एक हैं तथा उनकी गणना छायावादी कवि चतुष्टय के अन्तर्गत की जाती है। इन्हें प्रकृति का सुकुमार कवि कहा जाता है। खड़ी बोली कविता के लोकप्रिय कवि हैं।

भाषा के क्षेत्र में पन्तजी ने अधिक बारीकी से काम किया है। पन्तजी की भाषा में सम्प्रेषण की क्षमता विद्यमान है। उसमें कोमलकान्त मधुर पदावली का प्रयोग है। भारत माता कविता शान्त रस प्रधानता वाली, राष्ट्र भक्ति की व्यक्त करती रचना है। संस्कृत के तत्सम शब्दों के साथ तद्भव शब्दों के प्रयोग भी मृदुल भावों से किये हैं भारत माता कविता में ग्राम्य जीवन की शब्दावली का प्रयोग हुआ है। कहीं-कहीं जनप्रचलित उर्दू-फारसी के शब्दों का भी प्रयोग किया गया है। कोमलकान्त पदावली में संगीतात्मकता और गेयता है।