“सफल विक्रयकर्ता पैदा होते हैं बनाये नहीं जाते।” विवेचना कीजिए तथा उन गुणों की व्याख्या कीजिए जो एक आदर्श विक्रयकर्ता में होने चाहिए।

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“सफल विक्रयकर्ता पैदा होते हैं, बनाये नहीं जाते” (Good Salesman are Born, not Made )

“अच्छे विक्रयकर्ता पैदा होते हैं, बनाये नहीं जाते।” इस कथन से आशय यह है कि अच्छे विक्रयकर्ता में जन्मजात ही गुण होते हैं जिनके कारण वह अपने कार्य में अधिक सफल हो जाता है,

परन्तु आज की इस प्रगतिशील कम्प्यूटर के युग में जहाँ कोई भी कार्य असम्भव नहीं है, यह मान्यता उचित दिखाई नहीं देती कि अच्छे विक्रयकर्ता किसी भी प्रकार के प्रशिक्षण से तैयार नहीं किये जा सकते है। यद्यपि एक सीमा तक इसमें सत्यता अवश्यक है।

वे व्यक्ति जिनमें जन्म से विक्रयकर्ता के गुण उपलब्ध हैं और वे यदि व्यवहार में प्रवेश करते हैं तो निश्चय ही उन व्यक्तियों की तुलना में, जिनमें विक्रयकर्ता के जन्मजात गुण नहीं हैं, अधिक सफलता प्राप्त कर सकते हैं, परन्तु यह धारणा बना लेना कि परिश्रम करने पर भी अच्छा विक्रयकर्ता बन नही सकता, गलत है। आज शिक्षा, अनुभव एवं प्रशिक्षण के माध्यम से उन गुणों को प्राप्त किया जा सकता है, जो एक विक्रयकर्ता में होने चाहिए। अगर कोई व्यक्ति विक्रय कला का ज्ञान एवं प्रशिक्षण प्राप्त करके व्यवसाय में प्रवेश करता है तो निश्चित ही उसे सफलता प्राप्त होगी। इतना अवश्यक है कि जिन व्यक्तियों में विक्रयकर्ता के जन्मजात गुण हैं, उन्हें सफलता सरलता से प्राप्त हो जाती है अर्थात् वे सरलता से सफल विक्रयकर्ता बन जाते हैं।

एक सफल विक्रेता के आवश्यक गुण (Essential Qualities of a Successful Saler)

विक्रय यदि किसी व्यवसाय का हृदय है तो विक्रेता उसे धड़कन प्रदान करने वाला व्यक्ति होता है। एक विक्रेता व्यवसाय का प्रतिनिधि होता है जो ग्राहकों को उपक्रम की ओर से वस्तुओं की जानकारी देता है। ग्राहकों की समस्याओं का पता लगाते हैं, उनका समाधान करते हैं, ग्राहकों के मन को जीतते है, उनमें विश्वास उत्पन्न करते हैं और माल का विक्रय करते हैं। किन्तु सभी विक्रयकर्ता एक समान सफलता प्राप्त नहीं कर पाते हैं। सफल वे हो पाते हैं जो अपने व्यक्तित्व, ज्ञान, चतुराई, ईमानदारी से ग्राहकों को प्रभावित कर पाते हैं। अतः विक्रय कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए एक सफल विक्रेता में निम्न गुण होने चाहिए

(1) प्रभावशाली व्यक्तित्व-एक सफल विक्रेता का प्रभावशाली व्यक्तित्व होना चाहिए ताकि वह अपने ग्राहकों को आसानी से आकर्षित कर सके। एक सफल विक्रेता को अपने ग्राहकों का स्वागत प्रसन्नचित्त से करना चाहिए। संक्षेप में कहा जा सकता है कि उसका व्यवहार तथा उसकी बात का ढंग प्रभावशाली होना चाहिए।

(2) उत्सुकता – एक सफल विक्रेता को कभी निराश नहीं होना चाहिए। उसे सदैव उत्साही रहना चाहिए तथा उसमें सदैव उत्सुकता बनी रहनी चाहिए। यदि ग्राहक दुकान पर होता है और बिना सामान लिए चला जाता है तो विक्रेता को निराश नहीं होना चाहिए। उसे अपने ग्राहकों से बातचीत करते समय हमेशा ताजा तथा व्यवहारकुशल बना रहना चाहिए।

(3) अच्छा स्वास्थ्य तथा स्वभाव-विक्रेता का स्वास्थ्य ठीक होना चाहिए। उसे न तो अधिक मोटा होना चाहिए और न ही अधिक पतला ही। उसकी मुखाकृति आकर्षक होनी चाहिए। उसका पहनावा ठीक ढंग का होना चाहिए। विक्रेता को सदैव प्रसन्नचित्त, हँसमुख तथा अपने ग्राहकों से मैत्रीपूर्ण ढंग से मिलना चाहिए। उसके चेहरे पर परेशानी, गुस्सा, झुंझलाहट तथा लापरवाही का भाव नहीं होना चाहिए।

(4) महत्वाकांक्षी – एक सफल विक्रेता को सदैव उत्साही एवं महत्वाकांक्षी होना चाहिए। यदि उसमें महत्वाकांक्षा तथा उत्साह नहीं पाया जाता है तो अपना कार्य रुचि व लगन से नहीं कर सकता। इसीलिए कहा जाता है कि जहाँ इच्छा होती है वहाँ अपने आप मार्ग बन जाता है। यह वह मार्ग होता है जिस पर चलकर विक्रेता उन्नति कर सकता है। यही कारण है कि महत्वाकांक्षा को सफलता की कुँजी कहा जाता है।

(5) ईमानदारी तथा निष्ठा-एक सफल तथा अच्छे विक्रेता में ईमानदारी, सत्यनिष्ठा तथा वफादारी आदि गुणों का समावेश होना चाहिए। इसके माध्यम से मनुष्य में विभिन्न गुणों का निर्माण किया जा सकता है। इसीलिए आज व्यवसाय में ईमानदारी सर्वोत्तम गुण माना जाता है। वही इसकी माप है।

(6) आत्म विश्वास-एक सफल विक्रेता में आत्मविश्वास का पाया जाना भी नितान्त आवश्यक है। जिस व्यक्ति में आत्म विश्वास नहीं पाया जाता है उसे कम सफलता मिलने की सम्भावना होती है। इसीलिए कहा जाता है कि आत्मविश्वास के आधार पर बड़े-से-बड़े कार्य किये जा सकते हैं।

(7) परिश्रमी – एक अच्छे विक्रेता के लिए यह भी आवश्यक माना जाता है कि उसे अधिक-से-अधिक परिश्रमी होना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर उसे अतिरिक्त कार्य करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

(8) शिक्षा-वर्तमान युग में शिक्षा का प्रसार तथा प्रचार तीव्र गति से हो रहा है। इसीलिए एक विक्रेता को भी आज शिक्षित होना आवश्यक माना जाता है। इसकी आवश्यकता इस कारण पायी जाती है ताकि एक विक्रेता अपने ग्राहकों से अच्छी तरह से बातचीत करके आकर्षित कर सके। यही नहीं शिक्षा तथा प्रशिक्षण से गुणों का विकास होता है तथा इनमें निखार आता है। यही कारण है कि इसका विशेष महत्व पाया जाता है। विक्रेता के चुनाव में इसका विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है। शिक्षा आभूषण का कार्य करती है।

(9) प्रखर बुद्धि – एक सफल विक्रेता को प्रखर बुद्धि वाला होना चाहिए। इसका प्रभाव यह होगा कि वह अपने ग्राहकों की बातों को शीघ्रता से समझ सकेगा तथा उसकी चाहने वाली वस्तु को भी शीघ्रता से उसे दे सकेगा। साथ ही साथ यदि विक्रेता में यह गुण पाया जाता है तो उसका कार्य आसान हो जाता है। यदि ग्राहक किसी वस्तु के बारे में जानने की जिज्ञासा करता है तो विक्रेता को सन्तोषप्रद उत्तर देकर उसकी जिज्ञासा शान्त करनी चाहिए। यही प्रसार बुद्धि का प्रमुख लाभ होता है।

(10) सुरुचि-विक्रेता को हमेशा अच्छी रुचि वाला व्यक्ति होना चाहिए। उसका पहनावा भी सुरुचिपूर्ण होना चाहिए। ऐसा भी अवसर विक्रय के मध्य कभी-कभी आता है कि विक्रेता को अपनी सुरुचि दिखाने की आवश्यकता पड़ जाती है। जब ग्राहक किसी वस्तु के सम्बन्ध में निर्णय लेने में असमर्थ हो जाता है तब ऐसी स्थिति में ग्राहक विक्रेता से सलाह माँगता है, तब उसे अपनी सुरुचि दिखानी पड़ती है।

(11) नम्रता- एक सफल विक्रेता का व्यवहार विनम्र एवं सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए। विक्रेता को विनम्र भाव से बातचीत करनी पड़ती है। इसीलिए कहा जाता है कि विक्रेता का अपना व्यवहार विनम्र बनाना चाहिए तभी वह एक अच्छा एवं सफल विक्रेता हो सकता है। अन्त में यह कहना गलत न होगा कि एक विक्रेता जितना अधिक विनम्र होगा उतनी अधिक वस्तुओं की बिक्री होगी।

(12) चतुराई-एक सफल विक्रेता में चतुराई का भी गुण पाया जाना चाहिए। उसे किस ग्राहक के साथ कैसा तथा कब व्यवहार करना चाहिए इसके प्रति विक्रेता को सावधान रहना चाहिए। एक चतुर विक्रेता की अपनी वस्तुओं के गुण ग्राहक के समक्ष इस प्रकार रखने चाहिए ताकि ग्राहक को उसकी वाणी विनम्र लगे। इससे ग्राहक स्वाभाविक रूप से खरीदने के लिए आकर्षित होगा।

(13) सहिष्णुता – आजकल व्यावसायिक जगत् में सहनशीलता एक सफल विक्रेता की कुन्जी कही जाती है। इसीलिए कहा जाता है कि व्यक्ति को सहिष्णुता को बनाये रखना चाहिए। ग्राहकों को बातचीत के बीच यदि कोई कटु बात आ जाये तो उसे बुरा नहीं मानना चाहिए। उसे सदैव अपने ग्राहकों से सहिष्णुता के साथ व्यवहार करना चाहिए। उसे ग्राहकों को कभी घृणा से नहीं देखना चाहिए।

(14) धैर्य-विपरीत परिस्थितियों में धैर्य विक्रेता का धन होता है। प्रायः यह देखा गया है कि कभी-कभी दुकान पर कुछ ऐसे ग्राहक आ जाते हैं जिनसे निपटना कठिन होता है। ऐसी स्थिति में विक्रेता को प्रसन्नचित्त रहकर ग्राहक से बातचीत करनी चाहिए। उसे शान्ति, धैर्य के साथ सभी जानकारी देते रहना चाहिए।

(15) तीव्र स्मरण शक्ति-एक सफल विक्रेता की स्मरण शक्ति तीव्र होनी चाहिए ताकि वह अपने यहाँ बार-बार आने वाले पुराने ग्राहकों को पहचान सके। इससे विक्रेता तथा ग्राहकों के बीच अपनत्व की भावना उत्पन्न होती है। इससे ग्राहक की भावना भी यह कहने लगती है कि मैं इस दुकान का स्थायी ग्राहक हो गया हूँ। ऐसा तभी पाया जाता है जबकि विक्रेता का व्यवहार सहानुभूतिपूर्ण तथा अच्छा हो। इस प्रकार यह कहना गलत न होगा कि विक्रेता की अच्छी स्मरण शक्ति व्यवसाय को प्रभावित करती है तथा इससे संस्था की ख्याति में भी वृद्धि होती है।

(16) स्फूर्ति- एक विक्रेता में ग्राहक की सेवा करने की भावना पायी जानी चाहिए। यह तभी सम्भव है जब ग्राहक के प्रति उसकी अच्छी भावना हो। इसके लिए विक्रेता में साहस, चेतना, सहानुभूति तथा सेवा की भावना पायी जानी चाहिए। इसीलिए कहा जाता है कि विक्रेता में पर्याप्त स्फूर्ति पायी जानी चाहिए।

(17) विक्रय वस्तुओं का ज्ञान-एक विक्रेता को अपने व्यापार से सम्बन्धित वस्तुओं का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए अर्थात् विक्रेता को जागरूक व सतर्क होना चाहिए।

(18) ईमानदारी तथा निष्ठा-एक सफल तथा अच्छे विक्रेता में ईमानदारी, सत्यनिष्ठा तथा वफादारी आदि गुणों का समावेश होना चाहिए। इसके माध्यम से मनुष्य में विभिन्न गुणों का निर्माण किया जा सकता है। इसीलिए आज व्यवसाय में ईमानदारी सर्वोत्तम गुण माना जाता है। वही इसकी माप है।

(19) चरित्रवान-विक्रेता को चरित्रवान होना चाहिए। यदि विक्रेता का चरित्र अच्छा है तो ग्राहक आकर्षित होगा तथा बार-बार आने का प्रयास करेगा।

(20) पहल की योग्यता-एक अच्छे विक्रेता में पहल करने का गुण पाया जाना चाहिए। इस पहल के कारण ग्राहक वस्तुओं को खरीदने के लिए आकर्षित होगा तथा बिक्री में वृद्धि होगी।

(21) मानसिक सतर्कता एक अच्छे विक्रेता में मानसिक सतर्कता का पाया जाना भी आवश्यक होता है। उसमें उपयुक्त समय पर उपयुक्त बातें करने का गुण पाया जाना चाहिए। इससे ग्राहकों में दुकान पर बार-बार आने की इच्छा, उत्सुकता पैदा होगी। यह एक बहुत बड़ा गुण है।

(22) सहयोग की भावना-एक अच्छा विक्रेता एक उत्तम सहयोगी माना जाता है। उसमें सहकारिता की भावना पायी जानी चाहिए। यहीं नहीं प्रत्येक विक्रेता को अपने ग्राहकों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। उसे वस्तुओं के चुनाव में भी अपने ग्राहकों के साथ सहयोग करना चाहिए। यह एक ऐसी भावना होती है जो कि क्रेताओं को विक्रेता के नजदीक लाती है तथा दोनों में एक-दूसरे की भावनाओं को समझने का अवसर मिलता है।