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एक वेतन पाने वाला कर्मचारी किस-किस प्रोविडेण्ट फण्ड का सदस्य बन सकता है उनके नाम बताइये और उनमें से प्रत्येक के बारे में जो आय कर विधान है उनका वर्णन कीजिये।

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Name the various Provident Funds a salaried employee can become a member of and the income tax legislation applicable to each of them.

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‘प्रोविडेण्ट फण्ड’ का शाब्दिक अर्थ है ‘भविष्य के लिए प्रावधान करना’। ‘प्रोविडेण्ट फण्ड’ एक ऐसा कोष है जो भविष्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य बचत द्वारा निर्मित किया जाता है। वेतन पाने वाले कर्मचारियों का प्रोविडेण्ट फण्ड उसके नियोक्ता की सहायता से निर्मित होता है। नियोक्ता अपने कर्मचारी को देय वेतन में से एक निश्चित प्रतिशत अनिवार्य रूप से काटकर ‘प्रोविडेण्ट खाते’ में जमा करता है। नियोक्ता भी कर्मचारी द्वारा कटाई गई राशि के बराबर या उससे कुछ कम या अधिक कर्मचारी के उसी ‘प्रोविडेण्ट फण्ड खाते में जमा करता है। नियोक्ता का यह अंशदान कर्मचारी को उसके द्वारा देय वेतन के अतिरिक्त होता है। कर्मचारी एवं नियोक्ता के संयुक्त अंशदान से एकत्रित राशि प्रति माह उच्चतम में प्रोविडेण्ट फण्ड कमिश्नर के यहाँ अथवा किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में विनियोजित कर दी जाती है। इस विनियोग पर प्राप्त ब्याज भी सम्बन्धित कर्मचारी के ‘प्रोविडेण्ट फण्ड खाते में जमा कर दी जाती है। इस प्रकार, प्रत्येक कर्मचारी के प्रोविडेण्ट फण्ड खाते में उसका स्वयं का अंशदान, नियोक्ता का अंशदाने तथा दोनों पर ब्याज सम्मिलित होता है। सेवा समाप्ति पर अथवा सेवा छोड़ने पर इस फण्ड में एकत्रित धनराशि कर्मचारी को दे दी जाती है। कर्मचारी की मृत्यु पर इस फण्ड की धनराशि उसके उत्तराधिकारियों को दी जाती है।

विभिन्न प्रकार के प्रोविडेण्ट फण्ड (Different kinds of Provident Fund) एक वेतनभोगी कर्मचारी जिस-जिस प्रोविडेण्ट फण्ड का सदस्य हो सकता है वे निम्न हैं (1) वैधानिक प्रोविडेण्ट फण्ड (Statutory Provident Fund)- ये वे प्रोविडेण्ट फण्ड होते हैं

जो प्रोविडेण्ट फण्ड अधिनियम, 1925 के अन्तर्गत रखे जाते हैं। साधारणतया ये सरकारी संस्थाओं, अर्द्ध-सरकारी संस्थाओं, स्थानीय संस्थाओं, विश्वविद्यालयों आदि में रखे जाते हैं। कर्मचारी द्वारा इस फण्ड में वेतन में से किया गया अंशदान वेतन शीर्षक की आय की गणना करते समय कर योग्य होता है। यह वेतन में सम्मिलित रहता है। यदि कर्मचारी को फण्ड में उसका अंशदान घटाने के बाद शुद्ध वेतन दिया जाता है तो उसके वेतन में कुल राशि को (उसके द्वारा प्राप्त शुद्ध वेतन + कर्मचारी का अंशदान) शामिल किया जायेगा। अन्य शब्दों, कर्मचारी का स्वयं का अंशदान घटाने से पूर्व का वेतन उसके वेतन शीर्षक की आय में सम्मिलित किया जाता है। जब कोई कर्मचारी वैधानिक प्रोविडेण्ट फण्ड का सदस्य होता है तब नियोक्ता द्वारा उसके फण्ड में दिये गये अंशदान की राशि पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है अर्थात् नियोक्ता के अंशदान की राशि को कर्मचारी के वेतन में सम्मिलित नहीं किया जाता है। इस फण्ड में जमा रकम के ऊपर ब्याज को कर्मचारी के वेतन में सम्मिलित नहीं करते हैं अर्थात् यह कर से मुक्त है।

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(2) प्रमाणित प्रोविडेण्ट फण्ड (Recognised Provident Fund ) – आयकर अधिनियम में दी। गई व्यवस्थाओं के अन्तर्गत आयकर कमिश्नर द्वारा प्रमाणित प्रोविडेण्ट फण्ड इस श्रेणी में आते हैं। जब कोई कर्मचारी प्रमाणित प्रोविडेण्ट फण्ड का सदस्य होता है तो उसके वेतन में से उसके स्वयं के काटे गये अंशदान की राशि उसके द्वारा प्राप्त हुई समझी जाती है अर्थात् उसके द्वारा प्राप्त वेतन + कर्मचारी के अंशदान की राशि उसके वेतन में सम्मिलित की जाती है। इस सम्बन्ध में आयकर अधिनियम के वही नियम लागू होते हैं जो वैधानिक प्रोविडेण्ट फण्ड के सम्बन्ध में लागू होते हैं। यदि कर्मचारी प्रमाणित प्रोविडेण्ट फण्ड का सदस्य होता है तो नियोक्ता का अंशदान कर्मचारी के वेतन में उसके वेतन के 12% तक नहीं जोड़ा जाता है। इससे अधिक अंशदान की रकम कर्मचारी के वेतन में शामिल करेंगे। प्रमाणित प्रोविडेण्ट फण्ड की एकत्रित राशि पर जो ब्याज जमा किया जाता है वह 9-5% तक वेतन में शामिल नहीं किया जाता। इस प्रतिशत से अधिक ब्याज का भाग कर्मचारी के वेतन में सम्मिलित करते हैं।

(3) अप्रमाणित प्रोविडेण्ट फण्ड (Unrecognised Provident Fund ) वे प्रोविडेण्ट फण्ड जो वैधानिक प्रोविडेण्ट फण्ड अथवा प्रमाणित प्रोविडेण्ट फण्ड की श्रेणी में नहीं आते, अप्रमाणित फण्ड माने जाते हैं। साधारणतया ये फण्ड छोटे स्तर पर व्यापार करने वाले निजी संस्थाओं द्वारा रखे जाते हैं। कर्मचारी के अप्रमाणित प्रोविडेण्ट फण्ड के सदस्य होने पर आयकर के वही नियम लागू होते हैं जो वैधानिक एवं प्रमाणित प्रोविडेण्ट फण्ड के सम्बन्ध में लागू होते हैं अर्थात् कर्मचारी के वेतन में अंशदान से पूर्व की राशि सम्मिलित करते हैं। नियोक्ता का अंशदान कर्मचारी के वेतन में शामिल नहीं किया जाता है। इसका प्रावधान और वैधानिक प्रोविडेण्ट फण्ड का प्रावधान एक ही है। यदि कर्मचारी अप्रमाणित प्रोविडेण्ट फण्ड का सदस्य है तो इस फण्ड में प्रति वर्ष जमा होने वाला व्याज उसके वेतन शीर्षक की आय की गणना करते समय शामिल नहीं करेंगे।

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(4) सार्वजनिक प्रोविडेण्ट फण्ड (Public Provident Fund or PPE) सार्वजनिक प्रोविडेण्ट फण्ड एक बचत योजना है। व्यक्तिगत बचतों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केन्द्रीय सरकार ने 1968 में एक सार्वजनिक प्रोविडेण्ट फण्ड अधिनियम, 1968 (Public Provident Fund Act, 1968) पारित करके ‘सार्वजनिक प्रोविडेण्ट फण्ड’ की स्थापना की जनता का कोई भी व्यक्ति, वेतनभोगी तथा गैर वेतनभोगी, अर्थात् स्वयं का कारोबार, व्यवसाय, पेशा या धन्धा करने वाले इसके सदस्य हो सकते हैं। इस फण्ड में एकपक्षीय अंशदान (केवल फण्ड के सदस्य का) ही होता है। जो व्यक्ति इस फण्ड का सदस्य बनना चाहता है वह स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया या इसकी सहयोगी बैंकों की शाखाओं तथा 1 जनवरी, 1988 से किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा में अपना ‘प्रोविडेण्ट फण्ड खाता खोल सकता है। वेतनभोगी अन्य प्रोविडेण्ट फण्ड का सदस्य होते हुए भी इस फण्ड का सदस्य हो सकता है।

इस फण्ड से सम्बन्धित कुछ विशेष प्रावधान निम्न है-

(i) इस फण्ड में एक वर्ष में कम से कम ₹ 500 तथा अधिकतम ₹70,000 जमा किये जा सकते हैं। जमा की गई राशि एक मुश्त भी हो सकती है और मासिक भी, किन्तु जमा कराई गई राशि 5 के गुणन में हो सकती है।

(ii) इस फण्ड में एक माह में अधिकतम एक ही बार राशि जमा कराई जा सकती है।

(iii) इस कोष में जमा करायी गयी राशि 15 वर्ष बाद भुगतान योग्य हो जाती है। किन्तु कुछ दशाओं में आंशिक आहरण एवं ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है।

(iv) इस फण्ड पर ब्याज पूर्णतया आयकर से मुक्त हैं।

(v) सार्वजनिक प्रोविडेण्ट फण्ड में जमा राशि को किसी डिग्री या दायित्व के लिए कुर्क नहीं किया जा सकता।

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(vi) इस फण्ड के सदस्य की 15 वर्ष के अन्दर मृत्यु हो जाने पर फण्ड की सम्पूर्ण राशि उसके उत्तराधिकारियों को मिल जाती है।

(vii) इस फण्ड में जमा की गई राशि के सन्दर्भ में धारा 80C के अन्तर्गत कटौती प्राप्त होती है।