किस शैली में वक्ता तटस्य रहता है ? उदाहरण देते हुए उसकी विशेषताएँ लिखिये।

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सुस्पष्ट एवं प्रभावी रूप से अपनी बात को दूसरे तक प्रेषित करने की कला को शैली कहते हैं। शैली सामान्य कार्य पद्धति है। कथन शैली के परिप्रेक्ष्य में इसका अर्थ बात कहने की पद्धति से लगाया जा सकता है। विचारों का परिधान ही शैली है। संसार में जितने मनुष्य हैं, उनके बात कहने और बात करने का ढंग अलग-अलग होता है, अर्थात स्थूल रूप से यह कहा जा सकता है कि संसार में जितने मनुष्य हैं, उनके बात कहने और बात करने का ढंग अलग-अलग होता है, अर्थात स्थूल रूप से यह कहा जा सकता है कि संसार में जितने मनुष्य हैं, उतनी तरह की शैलियाँ होती हैं, यहाँ कवन शैली का तात्पर्य भाषा प्रयोग के ढंग से ही है। साहित्यिक दृष्टि से कथन की मुख्यतः चार शैलियाँ होती हैं

1. विवरणात्मक शैली, 2 मूल्यांकनपरक शैली, 3. व्याख्यात्मक शैली, 4. विचारात्मक शैली।

विवरणात्मक शैली-भाषा के प्रयोग की ऐसी शैली जिसमें घटना अथवा किसी वस्तु का यथावत् प्रस्तुतिकरण हो, जिसमें वक्ता तटस्थ हो, उसकी अपनी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त न हो, विवरणात्मक शैली कहलाती है। विवरण का अर्थ है-भाषा के माध्यम से किसी घटना अथवा व्यक्ति की यथावत प्रस्तुति घटना अथवा कव्य के विषय में वक्ता का अपना कोई राग या द्वेष नहीं होता। वह जैसा देखता है अथवा सुनता है वैसा विवरण प्रस्तुत कर देता है। वक्ता के द्वारा दिया हुआ विवरण दो प्रकार से होता है

(1) प्रत्यक्ष कथन के रूप में, जैसे—दीक्षित जी ने कहा, अचानक एक बूढ़ा व्यक्ति सड़क पर मोटर की चपेट में आकर गिर पड़ा, लहू से धरती रंग गई। वह बूढा घायल होकर भी चिल्ला रहा था, “मुझे जान-बूझकर मेरी सम्पत्ति हथियाने के लिए मार डालने का प्रयास किया गया है और मैं शायद अब बदूँगा भी नहीं ।”

(2) अप्रत्यक्ष के रूप में, जैसे- वर्षा हो रही थी, चारों ओर पानी ही पानी, कहीं सूखी जमीन नहीं, बादल और भी घने होते जा रहे थे, बिजली की कड़क और चमक भी अपना जोर दिखला रही थी। प्रत्यक्ष कथन के विवरण में वक्ता का उल्लेख होता है, पाठक जानता है कि वक्ता कौन है किन्तु अप्रत्यक्ष कथन के विवरण में वक्ता स्वयं व्यक्त नहीं होता।

विवरणात्मक शैली की विशेषताएँ (1) इसमें तथ्यपरकता होती है।

(2) अलंकारों वाली संरचनाएँ नहीं होती।

(3) कर्मवाच्य की संरचनाओं की अधिकता होती है।

(4) सामान्यतः ऐसा कोई वाक्य या वाक्यांश नहीं रहता जिसमें वक्ता की प्रतिक्रिया प्रकट हो।

(5) विवरण सामान्यतः भूतकाल में घटित बातों का होता है इसलिए साधारणतः इसमें भूतकाल के क्रियारूपों का प्रयोग किया जाता है।

(6) विवरणात्मक शैली में प्रायः वक्ता स्वयं प्रकट नहीं होता। वक्ता क्रम से विवरण देता है इसमें घटनाक्रम का यथावत वर्णन प्रस्तुत किया जाता है।

(7) विवरणात्मक कथन शैली की भाषा, सरल सुबोध व स्पष्ट होती है।

(8) विवरण शैली में विवरण होने के कारण वक्ता जो प्रत्यक्ष देखता है, उसका विवरण देता है।