सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 2 के अन्तर्गत निम्न शब्दों को परिभाषित कीजिए

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महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Important Definitions) : (i) निषिद्ध माल (Prohibited Goods)-सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 2 (33) के अनुसार, कोई माल जिसका आयात अथवा निर्यात इस अधिनियम या तत्कालीन प्रचलित किसी अन्य विधान के अन्तर्गत प्रतिबन्धित हो। लेकिन इसमें ऐसा माल सम्मिलित नहीं है जिसके बारे में ऐसी शर्तें जो निर्यात या आयात करने के लिए पूरी की जानी चाहिए, पूरी कर दी गई हों।

(ii) आयात (Import)-सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 2(23) के अनुसार, आयात (Import). का अर्थ भारत के बाहर किसी स्थान से माल भारत में लाना है। सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 2(24) के अनुसार, आयातित माल (Imported goods) से आयात ऐसे माल से है जो भारत से बाहर के किसी स्थान से भारत में लाया गया है, लेकिन इसमें ऐसे माल शामिल नहीं है जो घरेलू उपयोग के लिए लाए गए है। सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 2(25) के अनुसार, आयातक (Importer) किसी माल के सन्दर्भ में किसी भी समय अपने आयात के समय तथा उस समय के बीच जब माल की घरेलू उपयोग के लिए निकासी की जाती है तथा इसमें शामिल है कोई भी मालिक या ऐसा व्यक्ति जो स्वयं का आयातक बताए।

सरल शब्दों में, ‘आयात का अभिप्राय भारत के बाहर किसी स्थान (विदेशी) से माल लाने से है। आयातित माल के अन्तर्गत घरेलू उपयोग के लिए लाए गए माल के अलावा ऐसा माल आता है जो बाहर से लाया गया हो। भारत के बाहर से माल लाने वाला व्यक्ति आयातक कहलाता है।

(iii) निर्यात (Export)-धारा 2 (18) के अनुसार, निर्यात (Export) का अर्थ है भारत से बाहर किसी स्थान पर माल को ले जाना। धारा 2(19) के अनुसार, निर्यात माल (Export Goods) कोई माल जो भारत के बाहर किसी स्थान पर ले जाने के लिए भारत से बाहर ले जाया जाता है। धारा 2(20) के अनुसार, निर्यातक (Exporter) किसी माल के सन्दर्भ में किसी भी समय निर्यात हेतु माल के प्रवेश तथा वह समय जब माल निर्यात किया जाता है, के बीच जिसमें शामिल है मालिक या स्वयं को निर्यातक बताने वाला कोई व्यक्ति सरल शब्दों में, ‘निर्यात’ से अभिप्राय भारत के बाहर किसी स्थान अर्थात् विदेशों को माल भेजने से है जो माल भारत से बाहर भेजा जाता है उसे निर्यात माल कहते है तथा ऐसा करने वाला निर्यातक कहलाता है।

(iv) सीमा शुल्क क्षेत्र (Customs Area)- सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 2 (13) के अनुसार, सीमा शुल्क क्षेत्र से अभिप्राय सीमा शुल्क स्टेशन तथा कोई भी ऐसा क्षेत्र जहाँ सीमा शुल्क अधिकारिय द्वारा निकास से पूर्व आयातित माल या निर्यातित माल साधारणतः रखा जाता है। सीमा शुल्क बन्दरगाह का अर्थ है धारा 7(a) के अंतर्गत नियुक्त कोई सीमा शुल्क बन्दरगाह के रूप में बन्दरगाह तथा ऐसा कोई स्थान जो आंतरिक कन्टेनर डिपो के रूप में नियुक्त हो। सीमा शुल्क स्टेशन का अर्थ है, सीमा शुल्क बन्दरगाह, हवाई अड्डा या भूमि पर सीमा शुल्क स्टेशन

(v) तटवर्ती माल (Coastal Goods)- सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 2(7) के अनुसार, आयातित माल के अतिरिक्त माल, भारत में एक बन्दरगाह से दूसरे बन्दरगाह तक जहाज में ले जाया गया माल ।

(vi) तस्करी (Smuggling)-सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 2 (39) के अनुसार, सीमा शुल्क अधिनियम धारा 2(39) के अनुसार किसी माल के सन्दर्भ में तस्करी से तात्पर्य कोई ऐसी कार्यवाही या भूल, जो ऐसे माल को जब्त करने योग्य बना दे।

(vii) शुल्क योग्य माल (Dutiable goods) –सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 2 (14) के अनुसार, शुल्क योग्य माल से आशय ऐसे माल से है जिस पर इस अधिनियम के अन्तर्गत सीमा शुल्क लगता है, किन्तु अभी चुकाया नहीं गया है।

(viii) आयात रिपोर्ट (Import Manifest)- जब आयात किया जाने वाला माल कस्टम स्टेशन/क्षेत्र या वन्दरगाह में प्रवेश करता है तब हवाई जहाज, शिप या अन्य वाहन का इन्चार्ज कस्टम अधिकारियों के समक्ष आयातित माल का विवरण एक निर्धारित प्रारूप में पेश करता है तो इसे आयात रिपोर्ट कहा जाता है। यह फ्लोपी द्वारा भी दाखिल की जा सकती है। हवाई जहाज द्वारा आयात की दशा में 12 घण्टे के अन्दर तथा शिप द्वारा आयात की दशा में 24 घण्टे के अन्दर यह विवरण दाखिल किया जाता है। निर्धारित समय में यह विवरण न दाखिल करने पर ₹ 50,000 तक अर्थदण्ड लगाया जा सकता है Import Manifest’ में उस आयातित माल का विवरण दिया होता है जिसे उस विशेष कस्टम स्टेशन पर उतारा जाना है। सद्‌भावनावश बिना किसी कपटपूर्ण उद्देश्य के यदि इस प्रपत्र में त्रुटि हो गई है तो उसमें संशोधन भी किया जा सकता है।

सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 30 (1) के अनुसार, यह रिपोर्ट Ship या वाहन के आगमन से पूर्व जमा करानी चाहिए जिससे अधिकतम औपचारिकताएं पूरी करके Bill of Entry को अग्रिम पूरा किया जा सके। आयात रिपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक पद्धति द्वारा भी दाखिल की जा सकती है।

(ix) माल (Goods)- सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 2(22) के अनुसार, माल में निम्न को शामिल किया जाता है

(अ) जलयान, वायुयान एवं गाड़ियाँ, (ब) स्टोर्स, (स) यात्री सामान, (द) मुद्रा एवं विनिमय साध्य प्रपत्र,

(4) अन्य किसी प्रकार की सम्पत्ति।