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वार्षिक मूल्य की परिभाषा दीजिए एवं मकान सम्पत्ति की आय निर्धारित करने के लिए वार्षिक मूल्य में से की जाने वाली स्वीकृत कटौतियों का वर्णन कीजिए।

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करदाता की मकान सम्पत्ति से आय के निर्धारण में वार्षिक मूल्य का बहुत अधिक महत्त्व है।

वार्षिक मूल्य के सही निर्धारण पर ही मकान सम्पत्ति की करयोग्य आय ज्ञात की जा सकती है। वार्षिक मूल्य से आशय उस राशि से है, जितने में वह मकान उचित रूप से किराये पर दिया जा सकता है, चाहे वह मकान किराये पर उठा रखा हो अथवा मकान मालिक स्वयं रहता हो। यदि मकान का वास्तविक किराया उचित किराये से अधिक हो तो वास्तविक वार्षिक किराया ही उसका सकल वार्षिक मूल्य होगा। सकल वार्षिक मूल्य में से स्वामी द्वारा गतवर्ष में भुगतान स्थानीय कर घटाने के बाद जो राशि बचती है उसे ही वार्षिक मूल्य कहते हैं।

धारा 23 (1) के अनुसार, “किसी मकान सम्पत्ति के सकल वार्षिक मूल्य से तात्पर्य” (अ) उस राशि से है जितने में सम्पत्ति उचित रूप से प्रति वर्ष किराये पर उठाई जा सकती है; अथवा (ब) यदि सम्पत्ति या उसका कोई भाग किराये पर उठाया गया है और सम्पत्ति पर प्राप्त होने वाली वार्षिक किराया उपर्युक्त (अ) में वर्णित उचित किराये से अधिक है तो प्राप्त या प्राप्त होने वाला किराया, अथवा (स) यदि सम्पत्ति अथवा उसका कोई भी भाग किराये पर उठा हुआ तथा गत वर्ष में पूरी अवधि या आंशिक अवधि के लिए खाली रहा है तथा ऐसे खाली रहने के कारण स्वामी को इससे वास्तव में प्राप्त या प्राप्य किराया कम है, तो ऐसा प्राप्त या प्राप्य किराया।

वार्षिक मूल्य का निर्धारण (Determination of Annual Value) वार्षिक मूल्य निर्धारण करने के लिए मकान सम्पत्ति को निम्न वर्गों में विभक्त किया जा सकता है

(I) किराये पर उठे मकान का वार्षिक मूल्य (Annual Value of rented house) जो मकान-सम्पत्ति स्वामी द्वारा किराये पर उठा दी गई है उसे किराये पर उठी मकान-सम्पत्ति कहा जाता है। इसका वार्षिक मूल्य निर्धारित करने के लिए किराये पर उठी मकान-सम्पत्तियों को निम्न भागों में विभक्त किया जाता है—

कार्यशील पूँजी के विश्लेषण से आप क्या समझते हैं ? इस प्रकार के विश्लेषण में प्रयोग की जाने वाली विधियों की विवेचना कीजिए।

(1) किराया नियन्त्रण अधिनियम के अन्तर्गत न आने वाली मकान-सम्पत्ति— इन मकान-सम्पत्ति की दशा में ‘वार्षिक मूल्य’ वह राशि होगी जो ‘सकल वार्षिक मूल्य’ में से ‘स्थानीय कर’ घटाने के बाद आयेगी। सकल वार्षिक मूल्य निम्न की अधिकतम राशि होगी — (i) नगरपालिका मूल्यांकन, या (i) उचित किराया जो प्राप्त अथवा प्राप्त किराये से अधिक न हो। यदि प्राप्त या प्राप्य किराये की राशि इससे अधिक है तो प्राप्य किराया ही सकल वार्षिक मूल्य होगा। नगरपालिका मूल्य एवं उचित किराये में अधिकतम राशि को अनुमानित किराया कहा जाता है।

(2) किराया नियन्त्रण अधिनियम के अन्तर्गत आने वाली मकान-सम्पत्ति- किराया नियन्त्रण अधिनियम के अन्तर्गत आने वाली मकान सम्पत्ति का सकल वार्षिक मूल्य ठीक उसी प्रकार ज्ञात किया जायेगा जैसा कि सम्पत्ति पर किराया नियन्त्रण अधिनियम लागू नहीं होता है अर्थात् नगरपालिका मूल्य अथवा उचित किराया (जो भी अधिक है) किन्तु यह राशि प्रमापित किराये से अधिक नहीं होनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय के अनुसार, अनुमानित किराया प्रमापित किराये से कम हो सकता है किन्तु प्रमापित किराये से अधिक नहीं हो सकता, किन्तु यदि प्राप्त या प्राप्य किराया अनुमानित किराये से अधिक है, तो प्राप्त या प्राप्य किराया ही ‘सकल वार्षिक मूल्य’ होगा।

(3) ऐसी मकान सम्पत्ति जिनसे प्राप्त प्राप्य किराया अनुमानित किराये से कम है-यदि किसी मकान सम्पत्ति से प्राप्त अथवा प्राप्य किराया अनुमानित किराये से कम है तो प्राप्त किराये में कमी का कारण ज्ञात किया जायेगा। ऐसी कमी या तो खाली रही अवधि के कारण हो सकती है अथवा किन्ही अन्य कारणों जैसे सम्पत्ति कम किराये पर उठना, न वसूल हुआ किराया आदि के कारण हो सकती है। प्राप्त किराये की कमी की दशा में वार्षिक मूल्य निर्धारण निम्न प्रकार होगा

निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए मकान सम्पत्ति से करमवत आय, मकान निर्माण हेतु ऋण पर ब्याज ।

(i) जब प्राप्त या प्राप्य किराया खाली रही अवधि के कारण ही अनुमानित किराये से कम है तो प्राप्त अथवा प्राप्य किराया ही सकल वार्षिक मूल्य होगा।

(II) स्वयं के निवास में प्रयुक्त मकान का वार्षिक मूल्य (Annual value of self-occupied house property) स्वामी द्वारा स्वयं के निवास हेतु प्रयुक्त मकान सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य ज्ञात करने के लिए स्वयं के निवास वाले मकान को निम्न भागों में विभक्त कर सकते हैं

(1) गत वर्ष में पूर्ण रूप से स्वयं के निवास के लिए प्रयुक्त मकान सम्पत्ति-जब करदाता (स्वामित्व वाली सम्पत्ति कोई एक मकान अथवा किसी मकान का एक भाग हैं, जो उसके स्वयं के निवास में प्रयुक्त होता है, तो ऐसी मकान अथवा मकान के भाग का वार्षिक मूल्य ‘शून्य’ होगा बशर्ते कि निम्न दो शर्तें पूरी होती हों

(i) वह मकान सम्पत्ति अथवा उसका भाग गत वर्ष में किसी भी अवधि के लिए वास्तव में किराये पर नहीं उठाया गया; तथा (ii) उस मकान सम्पत्ति अथवा उसके भाग से अन्य कोई लाभ प्राप्त नहीं किया गया।

(2) पूर्णतः आवास में प्रयुक्त न होने वाली मकान सम्पत्ति—ऐसी मकान सम्पत्ति को निम्नलिखित तीन वर्गों में विभक्त किया जा सकता है— (i) मकान सम्पत्ति जो वास्तव में स्वामी के आवास में प्रयुक्त नहीं है—जब किसी मकान अथवा उसके किसी भाग को गत वर्ष में वास्तव में स्वामी के आवास में प्रयुक्त नहीं किया गया है तथा निम्न शर्तें पूरी होती हैं, तो ऐसी मकान सम्पत्ति अथवा उसके भाग का वार्षिक मूल्य ‘शून्य’ होगा

(a) स्वामी मकान अथवा उसके भाग को किसी दूसरे स्थान पर नौकरी या व्यवसाय अथवा पेशा आदि करने के कारण अपने स्वयं के निवास में वास्तव में प्रयुक्त न कर सका हो;

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(b) वह उस दूसरे स्थान पर किसी अन्य मकान में, जो उसका स्वयं का नहीं है, रहा हो;

(c) ऐसी मकान सम्पत्ति अथवा उसका कोई भाग गत वर्ष अथवा उसके किसी भाग के लिए वास्तव में किराये पर नहीं उठाई गई हो।

(d) स्वामी ने इस मकान से कोई और लाभ प्राप्त नहीं किया हो।

(ii) मकान सम्पत्ति जिसका एक भाग स्वयं के निवास में प्रयुक्त है तथा शेष भाग किराये पर उठा है—एक ऐसी मकान सम्पत्ति जिसकी दो या अधिक स्वतन्त्र रिहायशी इकाइयाँ हैं जिनमें से एक इकाई स्वामी के स्वयं के रिहायशी उद्देश्यों के लिए प्रयुक्त होती है तथा शेष इकाई या इकाइयों को किराये पर उठ दिया गया है, तो ऐसी मकान-सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य निम्न प्रकार वर्णित किया जायेगा

(a) स्वयं के आवास में प्रयुक्त इकाई का वार्षिक मूल्य ‘शून्य’ होगा।

(b) किराये पर उठी इकाई या इकाइयों का वार्षिक मूल्य उसी प्रकार गर्णित किया जायेगा जैसे किराये पर उठे मकानों का किया जाता है।

(iii) मकान सम्पत्ति जो गत वर्ष की कुछ अवधि के लिए स्वयं के आवास में प्रयुक्त है तथा शेष अवधि के लिए किराये पर उठी है यदि कोई मकान-सम्पत्ति गत वर्ष में कुछ अवधि के लिए किराये पर उठा दी गई है तथा शेष अवधि के लिए स्वामी के आवास में प्रयुक्त होती है तो ऐसी मकान सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य गत वर्ष में सम्पूर्ण अवधि के लिए किराये पर उठी मकान सम्पत्ति की भाँति गर्णित किया जायेगा। अर्थात् ऐसी मकान सम्पत्ति के वार्षिक मूल्य की गणना करते समय स्वयं के निवास में प्रयुक्त अवधि के लिए कोई छूट या राहत प्रदान नहीं की जायेगी।

सकल कुल आय क्या है ?

(3) एक से अधिक स्वयं के निवास वाली मकान सम्पत्ति-यदि करदाता एक से अधिक मकानों में से किसी एक मकान का वार्षिक मूल्य ‘स्वयं के निवास’ वाले मकान की तरह ज्ञात किया जायेगा तथा शेष मकानों का वार्षिक मूल्य उसी प्रकार ज्ञात किया जायेगा जैसे कि किराये पर उठे मकानों का। एक को छोड़कर शेष ‘स्वयं के निवास’ वाले मकानों को ‘किराये पर उठे मान लिया जाता है। किस मकान का मूल्यांकन ‘स्वयं के निवास’ की तरह किया जाये, यह स्वामी करदाता की इच्छा पर निर्भर करता है।

कटौतियाँ (Deductions)

(A) किराये पर दिये गये मकान के सम्बन्ध में कटौतियाँ किराये पर उठाई गई मकान-सम्पत्ति की करयोग्य आय निकालने के लिए उसके वार्षिक मूल्य में से निम्न कटौतियाँ स्वीकृत हैं

(1) मानक कटौती या वैधानिक कटौती — वैधानिक कटौती शुद्ध वार्षिक मूल्य के 30% के दी जाती है। किराये पर उठे हुए प्रत्येक मकान के लिए यह कटौती दी जाती है। बराबर

(2) ऋण पर ब्याज – यदि मकान-सम्पत्ति खरीदने, बनवाने, मरम्मत कराने या इसका पुनर्निर्माण कराने के लिए ऋण लिया गया है तो ऋण पर ब्याज की राशि (चाहे भुगतान किया गया हो अथवा नहीं) कटौती योग्य है।

इस सम्बन्ध में निम्नलिखित नियम महत्वपूर्ण हैं (i) यदि उपरोक्त वर्णित उद्देश्यों के लिए ऋण लिया गया था और उसे चुकाने के लिए कोई नया ऋण लिया जाता है तो नये ऋण का ब्याज भी कटौती योग्य है।-

(ii) ऋण लेने के लिए दी गई दलाली अथवा कमीशन कटौती योग्य नहीं है।

(iii) मकान-सम्पत्ति से आय की गणना करते समय ब्याज की राशि की कटौती स्वीकृत है चाहे ब्याज का भुगतान किया गया हो अथवा नहीं।

व्यवसाय की आय निकालने के लिए कौन-सी छूटे स्वीकृत है ?

(iv) मकान बनकर तैयार होने से पूर्व अथवा खरीदने से पूर्व अवधि का ब्याज-यदि मकान बनकर तैयार होने या खरीदने से पूर्व के गत वर्षों से सम्बन्धित ऋण पर ब्याज देय है और ऐसा व्याज इस अधिनियम के किसी प्रावधान के अन्तर्गत कटौती योग्य नहीं है तो व्याज मकान खरीदने अथवा बनकर तैयार होने वाले गत वर्ष से आरम्भ होकर 5 समान वार्षिक किस्तों में कटौती योग्य होगा। (B) स्वयं के रहने के मकान के सम्बन्ध में ब्याज की कटौती-जब स्वयं के रहने के मकान या उसके भाग का वार्षिक मूल्य शून्य माना जाता है, तो ब्याज की कटौती अधिकतम ₹30,000 तक स्वीकृत होगी। ऋण मकान खरीदने, बनवाने, पुनर्निर्माण करने या मरम्मत कराने के लिए लिया जा सकता है। यदि स्वयं के रहने का मकान 31.3.1999 के पश्चात् ऋण लेकर खरीदा जाता है अथवा बनवाया जाता है तो ब्याज की कटौती ₹2,00,000 तक स्वीकृत होगी।

यदि मकान खरीदने या बनवाने के लिए ऋण लिया गया था और इस ऋण का पूर्ण या आंशिक भुगतान नया ऋण लेकर किया गया है तो नये ऋणदाता से ब्याज के सम्बन्ध में प्रमाण-पत्र लेकर दाखिल करना चाहिए।