छत्तीसगढ़ आबकारी शुल्क अधिनियम का संक्षिप्त इतिहास एवं प्रमुख उद्देश्यों की विवेचना कीजिए।

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छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम का इतिहास (History of Chhattisgarh Excise Act) : आबकारी अधिनियम के इतिहास का प्रारम्भ सन् 1915 में हुआ था जिसे मध्य प्रान्त आवकारी अधिनियम, 1915 के नाम जाता था तथा जो केवल मध्य प्रांत के क्षेत्र में ही लागू होता था। सन् 1941 में इस अधिनियम की धारा XV के द्वारा इसमें बरार और जोड़ देने के कारण सन् 1915 के अधिनियम का नाम संशोधित करके मध्य प्रांत एवं बरार आबकारी अधिनियम, 1915 कर दिया गया। भारत में राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत मध्य प्रदेश राज्य अस्तित्व में आया। 1958 में मध्य प्रदेश में यह अधिनियम कुछ संशोधन के पश्चात् लागू किया गया। संशोधन में मध्य प्रांत एवं बरार अधिनियम, 1915 के स्थान ‘मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 कर दिया गया। यह सम्पूर्ण मध्य प्रदेश में 1 जनवरी, 1959 से लागू हुआ। मध्य प्रदेश का विभाजन कर मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य बनाए गए।

मध्य प्रदेश पुनः गठन अधिनियम, 2000 की धारा 78 के अंतर्गत मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के साथ-साथ अब छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 भी कहते हैं। आवश्यक संशोधनों सहित आबकारी अधिनियम दोनों राज्यों के अन्तर्गत वर्तमान में भी लागू है।

आबकारी अधिनियम, 1915 के मुख्य उद्देश्य (Main Objectives of Chhattisgarh Excise Act)

भारतीय संविधान में मादक पदार्थों पर उत्पाद शुल्क लगाने का अधिकार राज्यों को दिया गया है। इसका प्रमुख कारण यह है कि अगर कोई राज्य सरकार अपने राज्य में इन पदार्थों के सेवन पर रोक लगाना चाहे तो वह ऐसा कर सकती है।

छत्तीसगढ़ में मादक पदार्थों के सेवन पर तो प्रतिबन्ध नहीं है, लेकिन छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम में ऐसे प्रावधान किये गये है कि लोग मादक पदार्थों के सेवन के प्रति हतोत्साहित छत्तीसगढ़ आयकारी अधिनियम के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित है

  • मंदिरा के व्यापार को नियंत्रित एवं नियमित करना।
  • मदिरा तथा मादक पदार्थों पर कर एवं शुल्क लगाकर राज्य के लिए पर्याप्त आय की व्यवस्था करना।
  • मादक पदार्थों के थोक एवं फुटकर विक्रय सीमाओं को निर्धारित करना।
  • मादक द्रव्यों के संग्रहण एवं भण्डारण की अधिकतम सीमाएँ निर्धारित करना।
  • मादक द्रव्यों के आयात-निर्यात एवं विक्रय के लिए लाइसेंस परमिट एवं पास जारी करना।
  • मदिरा व्यापारियों के लिए लाइसेंस की उचित व्यवस्था करना तथा लाइसेंस प्रक्रिया निश्चित करना।
  • मदिरा एवं मादक पदार्थों के आयात-निर्यात, परिवहन, निर्माण एवं विक्रय की प्रक्रियाओं को निर्देशित, नियमित एवं नियंत्रित करना।
  • मंदिश गुणवत्ता को प्रभावी बनाना।
  • नियमों के क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त दण्ड की व्यवस्था करना।
  • मादक द्रव्यों के व्यापार में अवांछनीय कृत्यों एवं गड़बड़ियों को रोकना।
  • महत्वपूर्ण त्यौहारों, चुनावों आदि के समय पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मदिरालयों में शुष्क दिवसों की घोषणा कर इसके उपयोग पर पर्याप्त प्रतिबंध लगाए गए हैं।
  • पंचायतों आदि को अपने क्षेत्र में नए मदिरालयों की स्थापना को रोकने के अधिकार दिए गए है। उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति करने के लिए छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम मादक पदार्थों के सेवन में कमी लाने के सम्बन्ध में पर्याप्त सफलता तो नहीं प्राप्त कर सका है परन्तु फिर भी इस अधिनियम के कारण सरकार की राजस्व में पर्याप्त वृद्धि हुई है।