बेला की मान्यता है कि कोई उसे अपना नहीं समझता क्या आपका भी यही मत है ?.

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बेला का ऐसा सोचना एक हद तक ठीक था किन्तु मूलतः वह उसका भ्रम था। दरअसल बेला और उसके परिवार वालों के बीच की यह दूरी दोनों ओर की सोच में अंतर दूरी थी, जो वास्तविक नहीं थी। संयुक्त परिवार में छोटी बहू की जो भूमिका या आचरण होता है, उसे बेला नहीं निभा पा रही थी और अन्य सदस्य आधुनिक युग के आचार-विचार से वाकिफ नहीं थे, इसलिए उन्हें बेला घमण्डी लगती थी। दादाजी ने इस बात को समझा और बात बन गई। अतः मेरे विचार से बेला को परिवार वालों ने पराया नहीं समझा था। यही कारण है कि अच्छे व्यवहार से बेला पूरी तरह घुल-मिल गई।