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आयकर लगाने का आधार क्या है ? आयकर लगाने की विधि का वर्णन कीजिए। Income Tax

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आयकर aayaakar lagaane ka aadhaar kya hai

आयकर लगाने का आधार क्या है ? आयकर लगाने की विधि का वर्णन कीजिए।

भारत में आयकर की शुरुआत सर्वप्रथम 1860 से हुई। उस समय यह कर अंग्रेजी शासन काल में सर जेम्स विल्सन द्वारा लगाया गया था। आजादी के पश्चात् भारत में नया आयकर अधिनियम, 1961 में पारित किया गया, जो 1 अप्रैल, 1962 से लागू है।

आयकर से आशय ऐसे प्रत्यक्ष कर से है, जो करदाता की वार्षिक करयोग्य आय पर निर्धारित दर से केन्द्र सरकार द्वारा लगाया जाता है। करयोग्य आय का निर्धारण आयकर अधिनियम के प्रावधानों एवं नियमों के अनुसार किया जाता है। दूसरे शब्दों में, आयकर एक प्रत्यक्ष कर है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रत्येक व्यक्ति की गत वर्ष की शुद्ध करयोग्य आय पर निर्धारित दरों के आधार पर गणना करके वसूल किया जाता है। व्यक्ति में एक व्यक्ति, फर्म, कम्पनी, हिन्दू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों के समुदाय आदि आते हैं। इस प्रकार आयकर केन्द्रीय सरकार की आय का प्रमुख स्रोत है। एक करदाता की करयोग्य आय की गणना, उस पर कर की राशि की गणना एवं उस कर की राशि को वसूल करने का कार्य एक पृथक् विभाग द्वारा किया जाता है, जिसे आयकर विभाग कहते हैं।

आयकर की विशेषताएँ (Characteristics of Income Tax)

आयकर की प्रमुख विशेषताओं को निम्न प्रकार स्पष्ट कर सकते हैं-

  • आयकर केन्द्रीय सरकार द्वारा लगाया गया एवं वसूल किया जाता है।
  • आयकर का भार उसी व्यक्ति पर पड़ता है जो इसे चुकाता है।
  • आयकर प्रत्येक व्यक्ति की करयोग्य आय पर लगाया जाता है।
  • एक व्यक्ति के लिए कर योग्य आय का एक निश्चित भाग करमुक्त होता है। अतः इस सीमा के बाद जो आय बचती है उस पर आयकर लगाया जाता है।
  • आयकर का क्षेत्र काफी व्यापक है।
  • व्यक्ति की दशा में सम्पूर्ण आय पर एक जैसी दर से कर नहीं लगता है, बल्कि आय के विभिन्न खण्डों पर अलग-अलग दरों से कर की गणना की जाती है।
  • आयकर एक प्रत्यक्ष कर है।
  • आयकर की राशि का वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर केन्द्र एवं विभिन्न राज्यों के मध्य विभाजन किया जाता है।
  • आयकर उन व्यक्तियों पर लगाया जाता है, जिनकी आय किसी भी गत वर्ष में करमुक्त सीमा से अधिक होती है।
  • आयकर की दृष्टि से एक व्यक्ति की समस्त आय को पाँच शीर्षकों में विभाजित किया जाता है।
हास स्वीकार सम्बन्धी नियमों की विवेचना कीजिए।

आयकर लगाने के उद्देश्य (Objects of Charging Income Tax)- भारत में आयकर लगाने के प्रमुख उद्देश्य निम्न है

  1. सरकारी आय का एक प्रमुख साधन है।
  2. समाज में व्याप्त आर्थिक असमानताओं को दूर करना।
  3. बचत एवं विनियोगों को प्रोत्साहन देकर पूँजी निर्माण में सहायता करना।

आयकर गणना का आधार एवं विधि या प्रक्रिया (Basis and Process of Computing Income Tax) –

आयकर की गणना हेतु करदाता की कुल कर योग्य आय का निर्धारण उसकी निवासीय स्थिति के आधार पर किया जाता है। अतः एक करदाता की कुल आय एवं उसके द्वारा देय कर की गणना करने के लिए क्रमवार निम्न विधि या प्रक्रिया अपनायी जाती है

  • आय के शीर्षक- सर्वप्रथम प्रत्येक व्यक्ति की आय की गणना पाँच शीर्षकों के अन्तर्गत की जाती है। आय के ये पाँच शीर्षक (i) वेतन से आय, (ii) मकान सम्पत्ति से आय, (iii) व्यापार या पेशे के लाभ, (iv) पूँजी लाभ तथा (v) अन्य साधनों से आय हैं।

ऊपर वर्णित आय के प्रत्येक शीर्षक में आय को वर्गीकृत करके उसी शीर्षक में स्वीकृत कटौतियों के घटाने के बाद शेष राशि उस शीर्षक की शुद्ध करयोग्य आय होगी।

  • सकल कुल आय सकल कुल आय से आशय विभिन्न शीर्षकों की आयों के योग से है एवं जिसमें से धारा 80C से 800 तक की कटौतियाँ नहीं घटाई गई हैं।
  • कुल आय या कर योग्य आय सकल कुल आय में से धारा 80 C से 80 U तक की कटौतियाँ घटाने के बाद जो आय ज्ञात होती है, उसे कुल आय या करयोग्य आय कहते हैं।
  • करमुक्त सीमा कर निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए 60 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति एवं हिन्दू अविभाजित परिवार के लिए करमुक्त सीमा ₹2,50,000 है। 60 वर्ष या इससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए कर मुक्त सीमा ₹3,00,000 है तथा अति वरिष्ठ नागरिकों (80 वर्ष या इससे अधिक) के लिए कर मुक्त सीमा ₹5,00,000 है। फर्म, कम्पनी आदि करदाताओं की सम्पूर्ण कुल आय कर योग्य होती है।
  • कुल आय पर कर की गणना कर निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए व्यक्ति करदाताओं पर निम्न दरों से कर की गणना की जाएगी