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वाक्य संरचना से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिये।

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शब्दों का वह क्रमबद्ध समूह जिससे पूरा-पूरा भाव प्रकट हो, उसका कुछ अर्थ निकल सके, उसे वाक्य कहा जाता है। वाक्य की परिभाषा – सार्थक शब्दों का वह समूह, जो किसी भाव या विचार को प्रकट करे, उसे वाक्य कहते हैं।

 

भाषा रूपी गंगा वर्ण के उद्गम से निकलकर वाक्य के डेल्टा में आकार विशाल रूप धारण कर लेती है। जिस वाक्य रचना में भावों और विचारों को जितना अधिक प्रकट करने की सामर्थ्य होगी, वह उतनी ही श्रेष्ठ समझी जायेगी। अतः भाव या विचार प्रकट करने की सामर्थ्य वाक्य की प्रथम विशेषता है। दूसरी बात यह है कि वाक्य के अन्तर्गत निहित भाव अथवा विचारों की बोधगम्यता और तीसरी बात वाक्य में सरसता होनी चाहिये। इसलिये आवश्यकता इस बात की है कि पदक्रम का पूरी तरह ध्यान रखा जाना चाहिये। संक्षेप में, सही एवं प्रभावशाली वाक्य रचना के लिये वाक्य की आकांक्षा,

 

वाक्य की योग्यता तथा उसमें पदक्रम का पूर्णतः ध्यान रखा जाना चाहिये। संक्षेप में, एक विचार के पूर्णता से प्रकट करने वाले शब्द समूह को वाक्य कहते हैं। वाक्य के

 

छ तत्त्व होते हैं (1) सार्थकता – वाक्य में सार्थक शब्दों का होना आवश्यक है। निरर्थक शब्द भी वाक्य में किसी

 

अर्थ के सूचक बनकर आते हैं; जैसे-कैसी ऊटपटांग बातें कर रहे हो ?

 

(2) योग्यता- वाक्य में प्रत्येक शब्द के प्रकरण के अनुसार अर्थ देने की योग्यता अर्थात् क्षमता होनी चाहिये; जैसे- गाय घास खाती है।

 

(3) आकांक्षा वाक्य में आकांक्षा या जिज्ञासा का गुण होना चाहिये; जैसे- वह नित्य स्नान

व्याख्यात्मक शैली की सोदाहरण विवेचना कीजिए।

 

करता है।

 

(4) आसक्ति या निकटता-बोलते या लिखते समय वाक्य में प्रयुक्त शब्दों में परस्पर निकटता का होना आवश्यक है। साथ ही विराम चिह्नों का प्रयोग भी आवश्यक है। जैसे-सभी व्यक्ति खाना खा

 

चुके हैं।

 

(5) पदक्रम – वाक्य में शब्दों का क्रम में होना आवश्यक है। क्रम भंग होने पर अर्थ का अनर्थ

 

हो जाता है; जैसे

 

‘खा चुके हैं सभी खाना व्यक्ति। (अनर्थ)

 

सभी व्यक्ति खाना खा चुके हैं। (सही अर्थ)

 

(6) अन्वय- अन्वय से अभिप्राय है ‘मेल’ वाक्य में लिंग, वचन, पुरुष, काल तथा कारक आदि का क्रिया के साथ अनुकरणात्मक मेल होना चाहिये, जैसे- श्यामलाल जी स्नान कर चुके हैं। उपवाक्य उस स्थिति में जबकि कोई पूरा विचार एक से अधिक वाक्यों में प्रकट होता है, ऐसी

 

स्थिति में प्रत्येक को उपवाक्य कहा जाता है। उपवाक्य एक प्रकार से वाक्य ही होते हैं, जो मिश्र और संयुक्त वाक्य के अंग बनते हैं, जैसे

 

((i) मेरी मान्यता है कि सुधाकर चुनाव में विजयी होगा।

 

(ii) श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि तुम तो निमित्त मात्र हो।

 

वाक्यांश-जिन पद या पदों से मन का पूरा भाव प्रकट न होकर, केवल भाव का कुछ अंश ही प्रकट होता है, उसे वाक्यांश कहते हैं, जैसे-‘मैं’ अपना ‘राम वन को’ आदि।