XETO OFFICIAL

LEADING NEWS & MEDIA WEBSITE OF INDIA NATIONAL.

अनुक्रम से क्या तात्पर्य है ? इसका प्रयोग किस रूप में होता है ?

1 min read

अनुक्रम- प्रत्येक भाषा के वाक्यों में पद एक निश्चित व्यवस्था से व्यवस्थित रहते हैं इस व्यवस्था को ही अनुक्रम कहते हैं।

 

वाक्य स्तर पर पदों का अनुक्रम विचारणीय है। वाक्य में प्रयुक्त संज्ञा पदबन्धों तथा क्रिया पदबन्धों का एक निश्चित अनुक्रम होता है।

हिन्दी भाषा में प्रमुखतः निम्नलिखित रूप में अनुक्रम मिलता है (1) कर्ता + क्रिया

 

जैसे-ईश्वर है।

 

जैसे- निखिल सोता है।

 

(2) कर्ता पद + क्रिया पद (3) कर्ता पद + लक्ष्य स्थान + क्रिया जैसे- मोहन घर जाता है।

 

(4) कर्ता पद बंध + पूरक पदबंध क्रिया पदबंध (स्थिति एवं विकासबोधक-होना, रहना, बनना जैसी अकर्मक क्रियाएँ।) जैसे- (i) मोहन बीमार है। (ii) मोहन इंजीनियर बना। (iii) मोहन बीमार रहा।

 

(5) कर्ता पद बंध + को + पूरक पद बंध जिसमें क्रिया पदबंध (योजक ‘होना’ एवं स्थिति बोधक ‘रहना’ अकर्मक क्रियाएँ भी सम्मिलित हैं।)

 

जैसे- (i) मोहन को बुखार है। (ii) मोहन को जुकाम रहा। (6) कर्तापद बन्ध + कर्म + पद बंध (भोक्ता ) + क्रिया-पदबंध (सकर्मक क्रियाएँ, जैसे-पढ़ना,

 

खाना आदि )

 

जैसे- (i) मोहन पुस्तक पढ़ता है। (ii) मोहन रोटी खाता है। (7) कर्तापद बंध + को + कर्म-पदबंध (भोक्ता) + क्रिया पदबंध (मिलना चाहिए जैसी

 

क्रियाएँ)

 

जैसे- (i) मोहन को पुस्तक चाहिए। (ii) देवी सिंह को धन मिला। (8) कर्तापद बंध + कर्म पद बंध (संप्रदान) + कर्तापद बंध (भोक्ता) + क्रिया- -पद बंध (देना, भेजना जैसी द्विकर्मक क्रियाएँ।)

 

जैसे- (i) मालवीय जी ने युवक को गीता की प्रति दी। (ii) श्याम पुत्र को पैसा भेजता है।

 

(9) कर्तापदबंध + कर्मपदबंध + को पूरक + पदबंध क्रियापदबंध (समझ, बन, कह जैसी

 

क्रियाएँ)।

कर्मचंद ने पेड़ से एक डाली टूटकर अलग होने की बात क्यों कहीं ?

 

जैसे- भाई ने मुझको पराया समझा।

 

(10) कर्तापदबंध + को कर्म पदबंध + क्रिया पदबन्ध (‘लगना’ जैसी क्रियाएँ; + जैसे-सतीश

 

को आम अच्छा लगता है।) (11) कर्तापदबंध + कर्मपदबंध + को + लक्ष्यस्थान पदबंध क्रियापद बंध

 

(योजना जैसी प्रेरणाबोधक क्रियाएँ) ।

 

जैसे- अकबर ने मानसिंह को काबुल भेजा।

 

(12) निषेधवाची क्रिया के पूर्व आते हैं जैसे- (i) किंगकांग दारासिंह से नहीं जीत पायेगा। (ii) तुम रोटी मत खाना।

 

(13) निपातों का प्रयोग उस शब्द के बाद होता है जिस पर बल देना हो।

 

जैसे-राम ही जायेगा, तुम नहीं। (14) सम्बोधन एवं विस्मयादिबोधक वाक्य के प्रारम्भ में आते हैं

 

जैसे- अरे ! आप कब आये ?

 

(15) परसर्ग अपने नाम या सर्वनाम के बाद आते हैं। जैसे- (1) कमल ने गाना गाया। (ii) मैंने खेल खेला।

 

अतः वाक्यों में पदों के अनुक्रम पर तीन सोपानों में विचार अपेक्षित है

 

(i) आधारभूत वाक्य साँचों में प्रयुक्त पद अनुक्रम। (ii) अव्यय पदों का अनुक्रम (iii) विशिष्ट पदों का अनुक्रम

 

वाक्य में उद्देश्य और विधेय का सामान्य अनुक्रम उद्देश्य + विधेय होता है। सामान्यतः कर्मपद कर्तापद के बाद आता है।